रविवार, जून 03, 2018

मन ही बंधन और मन ही मोक्ष का कारण होता है - आचार्य श्री महाश्रमण जी

श्रुत ज्ञान से मन रूपी अश्व पर लगाई जा सकती है लगाम: महातपस्वी 

03.06.2018 तुम्मापलेम, गुन्टूर (आंध्रप्रदेश), JTN, जन-जन के मानस को सद्भावना, नैतिकता और नशामुक्ति जैसे सद्विचारों से अपने जीवन को अच्छा बनाने की पावन प्रेरणा अपने अमृतवाणी से प्रदान करते जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के एकादशमाधिशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अहिंसा यात्रा के प्रणेता आचार्यश्री महाश्रमणजी अपनी धवल सेना के साथ चेन्नई महानगर में वर्ष 2018 के चतुर्मास के लिए निरंतर गतिमान हैं। वर्तमान में महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी की धवल सेना राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 16 से निकल रही है। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरती आचार्यश्री की धवल सेना ऐसे लगती है मानों गंगा की धवल धारा जन-जन को तारने के लिए कल-कल कर प्रवाहित होती जा रही है। इस प्रदेश में भाषा की समस्या के बावजूद भी जब स्थानीय लोगों को किसी माध्यम से आचार्यश्री की इस महान अहिंसा यात्रा, आचार्यश्री के जीवन, आचार्यश्री के कठिन श्रम की जानकारी होती है तो उनके भी सर श्रद्धा के साथ नत होते हैं और ऐसे महान आचार्य के दर्शन कर अपने आपको भाग्यशाली महसूस करते हैं। 
रविवार को प्रातः आचार्यश्री अपनी धवल सेना के साथ चोवदावरम स्थित कल्लाम हरनधा रेड्डी इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलाॅजी से प्रस्थान किया। आज आसमान बिल्कुल साफ था, जिसके कारण प्रातः से ही सूर्य की किरणें धरती का तापमान बढ़ाने में जुट गईं। जैसे-जैसे सूर्य आसमान में चढ़ा धूप भी बढ़ती गई। यह गर्मी लोगों को बेहाल बनाने में सक्षम थी, किन्तु समताभावी आचार्यश्री के मुख की एक मोहक मुस्कान लोगों को उत्प्रेरित कर रही थी। आचार्यश्री लगभग दस किलोमीटर का विहार कर तुम्मापलेम स्थित श्री मित्तापाल्ली काॅलेज आॅफ इंजीनियरिंग में पधारे। 
काॅलेज परिसर में बने एक हाॅल में उपस्थित श्रद्धालुओं को आचार्यश्री ने पावन प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि जिस प्रकार आदमी के जीवन में शरीर और वाणी का महत्त्व होता है, उसी प्रकार मन का भी आदमी के जीवन में बहुत महत्त्व होता है। मन को एक प्रकार का दुष्ट अश्व (घोड़ा) बताया गया है जो आदमी को उत्पथ की ओर ले जा सकता है। इस अश्व को नियंत्रण में रखकर इसे अच्छा भी बनाया जा सकता है। 
मन बहुत तेज गति से चलने वाला अवश्य है और बिना नियंत्रण के आदमी को कुमार्ग की ओर भी ले जाता है। मन रूपी अश्व पर लगाम लगाने के लिए श्रुत के द्वारा ज्ञानार्जन करने का प्रयास करना चाहिए। अर्जित आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से ही इस घोड़े पर नियंत्रण किया जा सकता है। मन ही बंधन और मन ही मोक्ष का कारण होता है। मन दुःखों का बढ़ा सकता है और ही शांति प्रदान करने वाला होता है। मन मंत्र में लग जाए, मन धर्म में लग जाए तो वह पवित्र और अच्छा हो सकता है। पवित्र मन आदमी को सत्पथ की ओर ले जाने वाला हो सकता है। 

शनिवार, फ़रवरी 10, 2018

ससुर ने थाली में भरा नोटों का बंडल, दूल्हे ने हाथ जोड़कर कहा- मैं नहीं ले सकता
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Bhaskar news - Feb 09,2018 8:16 AM IST


झुंझुनूं (राजस्थान).जिले का कोलाली गांव मंगलवार की रात एक अनोखी शादी का गवाह बना। इस शादी ने समाज को एक अनूठा संदेश दिया। एयरफोर्स में तैनात दूल्हे को उसके ससुर ने शगुन के रूप में पांच लाख रुपए कैश देना चाहा तो दूल्हे ने हाथ जोड़कर मना कर दिया। उन्होंने किसी भी तरह के दहेज से इनकार कर दिया। जिसने भी सुना, उसने इस कदम के लिए दूल्हे और उनके परिवार की सराहना की। दूल्हे का फैसला सुन लोग हुए सन्न, दरअसल, कोलाली गांव के दिलीप सिंह की बेटी पल्लवी कंवर का विवाह मंगलवार को नागौर जिले के रहने वाले जयदीप सिंह के साथ हुआ। तय समय पर बरात आ गई। एक रस्म के दौरान दुल्हन के पिता ने पांच लाख रुपए एक थाल में रख कर जयदीप की तरफ बढ़ाया। जयदीप ने हाथ जोड़ लिए और कहा- मुझे यह सब नहीं चाहिए। वहां मौजूद लोग सन्न रह गए। जयदीप और उसके पिता लक्ष्मण सिंह ने कहा कि वे दहेज नहीं लेंगे। यह समाज के लिए अभिशाप है। इसे दूर करने का काम समाज को ही करना होगा। दुल्हन के घरवाले बार-बार आग्रह करते रहे। इस पर जयदीप ने ससुर के सामने दोनों हाथ जोड़ दिए। दूल्हे ने कहा- वह समाज के लोगों को संदेश देना चाहता है कि लोग बेटियों को बोझ न समझें। बिना दहेज शादी करने वाले युवा आगे आएं। पल्लवी के मामा रणदेव सिंह राठौड़ ने बताया- सगाई के वक्त ही जयदीप और उनके पिता ने दहेज के लिए मना कर दिया था, लेकिन दुल्हन के परिवार ने दहेज की पूरी तैयारी कर ली। कोरथ के दौरान शगुन के रूप में 5 लाख रुपए नकद लेकर आए लेकिन दूल्हे व उनके परिजनों ने साफ मना दिया। दुल्हन पल्लवी भी बीएससी, बीएड के साथ डबल एमए है।

साभार : श्री गणपत जी भंसाली

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