रविवार, फ़रवरी 02, 2025

161 वां मर्यादा महोत्सव 2025 का प्रथम दिन

भुज की धरा पर प्रारम्भ हुआ मर्यादा का महाकुम्भ ‘161वां मर्यादा महोत्सव’

गुजरात का प्रथम मर्यादा महोत्सव भुज के स्मृतिवन में हुआ समायोजित

सेवाकेन्द्रों पर आचार्यश्री ने की नियुक्तियां, सेवा को समर्पित रहा प्रथम दिवस

चतुर्विध धर्मसंघ में बनी रहे आध्यात्मिक सेवा भावना : तेरापंथाधिशास्ता महाश्रमण

अनेक कृतियां व जयतिथि पत्रक आचार्यश्री के समक्ष हुए लोकार्पित

करीब चार घंटे तक चलता रहा मर्यादा महोत्सव का कार्यक्रम


02.02.2025, रविवार, भुज, कच्छ (गुजरात), इस समय एक ओर जहां सनातन परंपरा में भारत के उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में महाकुम्भ में बसंत पंचमी के अवसर पर अमृत स्नान हो रहा है तो दूसरी ओर भारत के पश्चिम भाग में स्थित गुजरात प्रदेश के कच्छ जिले के भुज नगर में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, युगप्रधान, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में भुज में बने स्मृतिवन (जिसे वर्ष 2001 में आए भूकंप में हताहत हुए लोगों की स्मृति में बनाया गया है।) के परिसर में बने जय मर्यादा समवसरण में गुजरात के प्रथम मर्यादा महोत्सव व तेरापंथ धर्मसंघ की परंपरा का 161वां मर्यादा का महाकुम्भ मर्यादा महोत्सव का महामंगल शुभारम्भ हुआ। जय मर्यादा समवसरण के विशाल पण्डाल में श्रद्धा का पारावार उमड़ आया था। उपस्थित था तेरापंथ धर्मसंघ का चतुर्विध धर्मसंघ। मंच के मध्य दोपहर लगभग 12.15 बजे से कुछ समय पूर्व तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी विराजमान हुए तो श्रद्धालुओं के बुलंद जयघोष से पूरा स्मृतिवन गुंजायमान हो उठा। 

महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगलमहामंत्रोच्चार करने के उपरान्त तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु व श्रीमज्जयाचार्यजी का सश्रद्धा स्मरण करते हुए 161वें मर्यादा महोत्सव के त्रिदिवसीय कार्यक्रम के शुभारम्भ की घोषणा की। तत्पश्चात आचार्यश्री ने मर्यादा महोत्सव के आधार पत्र ‘मर्यादा पत्र’ को स्थापित किया और इसके साथ ही प्रारम्भ हो गया गुजरात में समायोजित प्रथम मर्यादा महोत्सव का भव्य कार्यक्रम। चतुर्विध धर्मसंघ ने जयघोष करने के उपरान्त मुनि दिनेशकुमारजी के नेतृत्व में मर्यादा गीत का संगान किया गया। 

उपासक श्रेणी ने गीत का संगान किया। मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति-भुज के स्वागताध्यक्ष श्री नरेन्द्रभाई मेहता ने अपनी अभिव्यक्ति दी। सेवा के लिए समर्पित इस प्रथम दिवस पर साध्वीवृंद की ओर से साध्वी मुदितयशाजी ने आचार्यश्री से सेवा में नियोजित करने की प्रार्थना की तो मुनिवृंद की ओर मुनि कुमारश्रमणजी ने सेवा में नियोजित करने की प्रार्थना की। 

तदुपरान्त साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को तेरापंथ धर्मसंघ में सेवा के महत्त्व को व्याख्यायित किया। 161वें मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिवस पर तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन संबोध प्रदान करते हुए कहा कि आज जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ का मर्यादा महोत्सव का त्रिदिवसीय समारोह शुरु हुआ है। बसंतपंचमी के दिन से यह समारोह शुरु होता है। इसके प्रथम दिन सेवा की बात होती है। सेवा एक धर्म है। सेवा से कितना पुण्योपार्जन हो सकता है। सेवा के अनेक प्रकार हो सकते हैं। किसी की शारीरिक सेवा करना, वृद्ध को सहारा देना, भोजन देना, दवाई देना, किसी के शरीर की सार-संभाल करना। आज की बात शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक सेवा करने की बात है। वैय्यावृत्त के रूप में सेवा के अलावा अन्य प्रकार से भी सेवा की जा सकती है। प्रवचन करना भी एक प्रकार की सेवा है। साधु-साध्वियां न्यारा में रहें तो आठ प्रहर में एक बार व्याख्यान देने का प्रयास करना चाहिए। परम पूज्य आचार्यश्री तुलसी के समय तो माईक आदि की व्यवस्था भी नहीं होती थी, तब भी वे प्रतिदिन प्रवचन किया करते थे। आज कई साधु-साध्वियों का दीक्षा दिवस है तो दीक्षा देना भी एक प्रकार की सेवा है। मुनिकुमारश्रमणजी के निमित्त से दीक्षा की बात याद आ गई। 

गुरुदेव तुलसी प्रवचन करते थे। वे अध्यापन भी कराते थे। ग्रंथ पढ़ाना, वर्तनी शुद्ध कराना, साधु-साध्वी के सेवा की व्यवस्था। धर्मसंघ की सेवा करना। साधु-साध्वियों की पृच्छा करना। समाज की संस्थाओं की भी सेवा करते थे और फिर यात्रा करना। आचार्यश्री तुलसी पहली बार कोलकाता और दक्षिण भारत पधारे थे। उनसे पहले हमारे धर्मसंघ में कोई भी आचार्य न कोलकाता पधारे और न ही दक्षिण भारत पधारे थे। पारमार्थिक शिक्षण संस्था की मुमुक्षु बाइयों को संभालना भी अच्छी सेवा है। साध्वीवर्या और अनेक समणियां भी इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। समाज के लोग अपने ढंग से ध्यान दे लेते हैं। इनकी सेवा करना भी अच्छी बात होती है। मुमुक्षु की संख्या वृद्धि का प्रयास जितना संभव हो सके, करने का प्रयास करना चाहिए। 

आचार्यश्री ने सेवाकेन्द्रों पर सेवा की नियुक्ति का क्रम प्रारम्भ करते हुए कहा कि लाडनूं सेवाकेन्द्र (साध्वीवृंद) में साध्वी कार्तिकयशाजी के ग्रुप को सेवा के लिए नियोजित किया। बीदासर समाधिकेन्द्र में साध्वी मंजुयशाजी के ग्रुप को नियुक्त किया। श्रीडूंगरगढ़ सेवाकेन्द्र में साध्वी संगीतश्रीजी व साध्वी परमप्रभाजी के ग्रुप को नियोजित किया। गंगाशहर सेवाकेन्द्र में साध्वी विशदप्रभाजी व साध्वी लब्धियशाजी के ग्रुप को तथा हिसार उपसेवाकेन्द्र में साध्वी शुभप्रभाजी के गुप को सेवा के लिए नियोजित किया। संतों के सेवाकेन्द्र में छापर सेवाकेन्द्र के लिए मुनि देवेन्द्रकुमारजी के ग्रुप को तथा जैन विश्व भारती, लाडनूं में मुनिश्री विजयकुमारजी स्वामी के ग्रुप के साथ मुनि तन्मयकुमार व मुनि कांतिकुमारजी को सेवा के लिए नियुक्त किया। आचार्यश्री ने गंगाशहर में सेवा के लिए मुनिश्री कमलकुमारजी स्वामी के ग्रुप को सेवा के लिए नियुक्ति देने के साथ-साथ गंगाशहर की अच्छी सार-संभाल करने की अभिप्रेरणा भी प्रदान की। 

तदुपरान्त आचार्यश्री ने समस्त साधु-साध्वियों को सेवा की भावना को पुष्ट बनाए रखने की प्रेरणा भी प्रदान की। सेवा का संस्कार सभी में अच्छे रूप में बने रहें। श्रावक समाज भी कितनी सेवा देते हैं। दवा, चिकित्सा आदि के अलावा साधु-साध्वियों की यात्रा व्यवस्था में साथ चलना, डेरों आदि में रहते हैं। सभी में आध्यात्मिक सेवा की भावना बनी रहे। 

जैन विश्व भारती के द्वारा प्रकाशित आचार्यश्री की कृति ‘छह बातें ज्ञान की’, समणी कुसुमप्रज्ञाजी के सहयोग से ‘प्रकिर्णक संचय’ तथा जय तिथि पत्रक आदि आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की गई। मित्र परिषद, कोलकाता द्वारा तिथि दर्पण को भी आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया गया। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। समणी कुसुमप्रज्ञाजी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। ‘बेटी तेरापंथ की’ की सदस्याओं ने गीत का संगान किया। आचार्यश्री ने बेटियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। 

आज के कार्यक्रम में स्थानकवासी समुदाय की साध्वीजी भी आई थीं। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। ‘जो प्राप्त है, वह पर्याप्त है’ नामक ग्रंथ को छाजेड़ परिवार द्वारा आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया गया। श्रीडूंगरगढ़ छाजेड़ परिवार की बहू-बेटियों ने गीत का संगान किया। डॉ. शांताबेन, विकास परिषद के सदस्य श्री पदमचंद पटावरी तथा श्रीमती मनीषा छाजेड़ ने ग्रंथ के संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। 

आचार्यश्री ने इस ग्रंथ के संदर्भ में कहा कि संघसेवी स्व. कन्हैयालाल छाजेड़ के स्मृति ग्रंथ के संदर्भ में आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि इससे पाठकों को अच्छी प्रेरणा मिले। इनके परिवार में अच्छे धार्मिक संस्कार पुष्ट होते रहें।
भारतीय जनता पार्टी के कच्छ जिलाध्यक्ष श्री देवजी भाई अहीर ने आचार्यश्री के दर्शन कर अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। स्मृतिवन के डायरेक्टर श्री पाण्डेयजी, अमृतवाणी के अध्यक्ष श्री ललित दुगड़, श्री मदनलाल तातेड़, आचार्य भिक्षु समाधि स्थल संस्थान, सिरियारी की ओर से श्री मर्यादा कोठारी, आचार्यश्री तुलसी शांति प्रतिष्ठा, गंगाशहर की ओर से श्री हंसराज डागा, प्रेक्षा विश्व भारती के श्री भेरुभाई चौपड़ा, प्रेक्षा इंटरनेशनल के अध्यक्ष श्री अरविंद संचेती ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री के मंगलपाठ से मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिवस का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेशकुमारजी ने किया। लगभग चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम को आदिनाथ चैनल व तेरापंथ के यूट्यूब चैनल ‘तेरापंथ’ पर लाइव किया गया। जिससे देश व विदेश में बैठे श्रद्धालु लाभान्वित हुए।  



गुर्जर धरा पर आयोजित हो रहा है प्रथम मर्यादा महोत्सव

श्रद्धा, भक्ति एवं समर्पण के त्रिवेणी संगम स्वरूप तेरापंथ के महाकुंभ का

कच्छ (गुजरात) की धरा पर हुआ भव्य आग़ाज़

मर्यादा के शिखर पुरुष आचार्य श्री महाश्रमणजी के मुखारविंद से नमस्कार महामंत्रोच्चार से त्रिदिवसीय मर्यादा महोत्सव का हुआ प्रारंभ

पूज्य गुरुदेव युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आचार्य श्री भिक्षु एवं श्रीमद् जयाचार्य का स्मरण करते हुए 161 वें मर्यादा महोत्सव के प्रारम्भ की घोषणा करते हुए ऐतिहासिक मर्यादा पत्र की स्थापना की


बहुश्रुत परिषद् सदस्य मुनिश्री दिनेशकुमारजी द्वारा घोष उच्चारण एवं "भीखणजी स्वामी भारी मर्यादा बांधी" गीत के संगान के पश्चात उपासक श्रेणी ने दी "ओ गुरु दो ऐसा आशीर्वर" गीत की श्रद्धाशिक्त प्रस्तुति


पूज्य प्रवर के समक्ष साधु साध्वी वृंद द्वारा सेवा हेतु नियुक्ति के लिए क्रमशः किया गया निवेदन

साध्वी समाज की ओर से साध्वी श्री मुदितयशाजी ने किया सेवा हेतु नियुक्ति का निवेदन

संत समाज की ओर से मुनिश्री कुमारश्रमण जी ने किया सेवा हेतु नियुक्ति का निवेदन


साध्वीवर्या साध्वी श्री सम्बुद्धयशाजी ने मर्यादा महोत्सव के अवसर पर सेवा के सन्दर्भ में प्रस्तुत की अपनी भावाभिव्यक्ति


पूज्य गुरुदेव युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने उपस्थित श्रद्धालु समाज को सेवा के संदर्भ में प्रदान किया प्रेरणा पाथेय

जो दूसरों के लिए कार्य करे वह कार्यकर्ता होता है : युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी


161 वें मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिवस पूज्य गुरुदेव द्वारा आगामी वर्ष के लिए विभिन्न सेवा केंद्रों में सेवा हेतु नियुक्तियों की हुई घोषणा



मर्यादा महोत्सव के उपलक्ष में भुज से तेरापंथ की बेटियों ने दी "महाश्रमण इस युग में तेरापंथ के राम" गीत की श्रद्धासिक्त प्रस्तुति


पूज्य गुरुदेव की सन्निद्धि में विकास परिषद् के पूर्व संयोजक स्व. कन्हैयालाल जी छाजेड़ से सम्बद्ध स्मृति ग्रन्थ "जो प्राप्त है वह पर्याप्त है" का हुआ लोकार्पण










मंगलवार, अक्टूबर 22, 2024

हे महाश्रमण ! मैं तुझे क्या कहूँ


हे महाश्रमण ! मैं तुझे क्या कहूँ !!!

             

सूर्य का प्रकाश कहूँ  या चन्द्रमा की शीतलता कहूँ ,

करुणा की झील कहूँ  या ज्ञान का सागर कहूँ  !

कोमल की मधुरता कहूँ  या शहद की मिठास कहूँ ,

तारा कहूँ  या ध्रुव तारा कहूँ , निर्मल कहूँ  या निर्मलता कहूँ !

मां की ममता कहूँ  या पिता का प्यार कहूँ ,

भाई का कर्तव्य कहूँ  या वात्सल्य का झरना कहूँ  !

कोमल की मधुरता कहूँ  या शहद की मिठास कहूँ  !

विद्यालय कहूँ  या विश्वविद्यालय कहूँ ,

आलय कहूँ  या आत्म हिमालय कहूँ !

अनुकम्पा का प्रसाद कहूँ  या प्रभु का आशीर्वाद कहूँ !

दिव्यता कहूँ  या भव्यता कहूँ , सुंदरता कहूँ  या आत्म सुंदरता कहूँ !

नम्रता कहूँ  या विनम्रता कहूँ  समता कहूँ  या सरलता कहूँ !

नोट कहूँ  या नोटों का बैंक कहूँ , कुछ कहे तो आध्यात्मिक एटीएम कहूँ !

तपस्वी कहूँ  या महातपस्वी कहूँ , यशस्वी कहूँ  या महायशस्वी कहूँ !

उज्ज्वलता का आकाश कहूँ  या संकल्पों की बरसात कहूँ  !

जल कहूँ  या जल की तरंग कहूँ ,

 कुछ कहूँ  तो जीवन की उमंग कहूँ !

   ज्योति कहूँ  या ज्वाला कहूँ , 

  कुछ कहूँ  तो दिव्य उजाला कहूँ  !

मान कहूँ  या आत्म सम्मान कहूँ !

मैं तो तुलसी महाप्रज्ञ का हनुमान कहूँ 

सत्य कहूँ  या शाश्वत कहूँ , समझ में नहीं आता है,           मैं क्या कहूँ !

अगर कुछ कहूँ  तो शाश्वत ज्ञाता दृष्टा कहूँ !

पुष्प कहूँ  या हृदय का हार कहूँ !

अगर कुछ कहूँ  तो जगत का पालनहार कहूँ !          

विशेषण कम विशेषताएं अनेक हैं,  शब्द कम उपमाएं अनेक हैं !

हे महाश्रमण ! तुझे मैं क्या कहूँ , 

 अगर कुछ कहूँ  तो ये ही कहूँ 

मेरे हृदय की सांस कहूँ , 

तुलसी , महाप्रज्ञ और तीर्थंकर

का साक्षात कहूँ !

हे नेमा नंदन, झूमर वंदन मेरे महाश्रमण तुझे प्रणाम !!!!


 -  हेमन्त छाजेड़

शुक्रवार, फ़रवरी 16, 2024

160 वें मर्यादा महोत्सव का तृतीय दिवस


*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*


*📿 पूज्य प्रवर द्वारा नमस्कार महामन्त्र के समुच्चारण के साथ तृतीय दिवस के कार्यक्रम का हुआ शुभारम्भ*


*🌀 पूज्य प्रवर द्वारा खड़े होकर गुरुदेव तुलसी द्वारा विरचित "भीखण जी स्वामी भारी मर्यादा बांधी संघ" में गीत का हुआ संगान* 





*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*


*📿  तृतीय दिवस का कार्यक्रम*


*🌀  समणी वृन्द द्वारा गीत संगान* 


*सारी धरती पर बिछी अंशुमाला*

*मिला है पन्थ भिक्षुवाला*




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*📿  तृतीय दिवस का कार्यक्रम*

*🌀  साध्वीवृन्द  द्वारा गीत संगान* 

*जय भिक्षु का गण अनुशासन*
*अब सारे जंहा में गूँजेगा*




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*📿  तृतीय दिवस का कार्यक्रम*

*🌀  संतो द्वारा ऊर्जावान गीत का सामूहिक संगान* 

 *कैसी बजरंगी बहुरंगी श्री भीखण की छाती है*





*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*👉🏻 "160 वां मर्यादा महोत्सव" - तृतीय दिवस (मुख्य दिवस)*

*📿  साध्वी प्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी द्वारा अनुशासन एवं मर्यादा विषय पर मंगल उद्बोधन*

*जो व्यक्ति मर्यादा, अनुशासन का पालन करता है वह सफलता को प्राप्त करता है : साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी*



*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम के तृतीय दिवस का लाइव अपडेट वाशी - नवी मुम्बई से ...*


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*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*👉🏻 "160 वां मर्यादा महोत्सव" - तृतीय दिवस (मुख्य दिवस)*

*💢  अनुपम नजारा, अदभुत दृश्य*

💠 *मर्यादा महोत्सव के तृतीय दिवस पुज्य प्रवर की अमृतवाणी सुनने उमड़ा जनसैलाब*

🌀 *हजारों की संख्या में उपस्थित श्रावक - श्राविका समाज*





*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*📿  तृतीय दिवस का कार्यक्रम*

*🌀  *परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने चतुर्विध धर्मसंघ को प्रदान करवाया प्रेरणा पाथेय*

 हमारे तेरापंथ धर्म संघ में पांच एकता है : आचार्य श्री महाश्रमण
1)एक आचार  की एकता
2 )एक  विचार की एकता 
3) एक आचार्य (प्रधान)की एकता 
4) एक विधान (मर्यादाओं)की एकता
 5) शिष्यों की एकता (शिष्य एक गुरु के)




*📿  तृतीय दिवस का कार्यक्रम*

*🌀 परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने चतुर्विध धर्मसंघ को प्रदान करवाया प्रेरणा पाथेय*

*परम पूज्य गरूदेव ने मर्यादा से सम्बद्ध गीत का संगान कर मर्यादाओ का किया विवेचन*

*"गुरुवर हमको मर्यादा का आधार चाहिए"*

महत्वपूर्ण मर्यादा का उल्लेख
मर्यादा शिरोमणि मर्यादा
1)सर्व साधु साध्वी एक आचार्य कि आज्ञा में रहे
2)विहार चातुर्मास आचार्य की आज्ञा से करे
3)कोई भी साधु साध्वी अपना अपना शिष्य शिष्याएं न बनाये
4)आचार्य भी योग्य व्यक्ति को दीक्षित करे। दीक्षा के पश्चात अयोग्य निकले तो गण मुक्त कर दे।
5)आचार्य अपने गुरु भाई या किसी को उत्तराधिकारी चुने तो सभी उसे सहर्ष स्वीकार करे।




*📿  तृतीय दिवस का कार्यक्रम*

*🌀 परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी ने चतुर्विध धर्मसंघ को प्रदान करवाया प्रेरणा पाथेय*

*पूज्य गुरुदेव ने उपासक श्रेणी, ज्ञानशाला, किशोर मण्डल, युवक परिषद्, कन्या मण्डल, महिला मण्डल, तेरापन्थ प्रोफेशनल फोरम, जैन विश्व भारती, अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी, प्रेक्षा विश्व भारती, प्रेक्षा इंटरनेशनल, प्रेक्षा फाउंडेशन, अमृत वाणी, अणुव्रत न्यास, भिक्षु समाधि स्थल संस्थान - सिरियारी, आचार्य तुलसी शान्ती प्रतिष्ठान का विशेष उल्लेख करते बौद्धिक माला से सम्बोधित करते हुए उनके विकास की मंगलकामना की ।*

*मुख्य प्रवचन कार्यक्रम में अणुव्रत अमृत महोत्सव वर्ष की समाप्ति (12 मार्च 2024) तक प्रतिदिन प्रवचन कार्यक्रम में "अणुव्रत गीत" संगान करने हेतु दिया निर्देश*




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*👉🏻 "160 वां मर्यादा महोत्सव" - तृतीय दिवस (मुख्य दिवस)*

*📿  वाशी - मुम्बई के उपलक्ष में पूज्य गुरुदेव युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी द्वारा समुच्चारित गीत*



*🏵️ तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का तृतीय दिवस (मुख्य दिवस) : वाशी , नवी मुम्बई*

*🍁पूज्यप्रवर द्वारा सन् 2024 के चारित्रात्माओं के चातुर्मासों / विहार की घोषणा*

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साभार- अमृतवाणी



*🏵️ तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का तृतीय दिवस (मुख्य दिवस) : वाशी , नवी मुम्बई*

*🍁पूज्यप्रवर द्वारा सन् 2024 के चारित्रात्माओं के चातुर्मास / विहार की घोषणा*



*📜 पूज्य प्रवर द्वारा दीक्षाओं व यात्रा के संदर्भ में विविध घोषणाएं*
_*👉🏻 "160 वां मर्यादा महोत्सव" - तृतीय दिवस (मुख्य दिवस)*_


युगप्रधान की यशस्वी अनुशासना, मर्यादा के महा उत्सव का अनुपम, अदभुत नज़ारा, चतुर्विद् धर्मसंघ की गरिमा पूर्ण उपस्थिति, नवीन घोषणाओं के क्रम से अहलादित श्रावक समाज,  वाशी बना काशी । 

मर्यादा के शिखर पुरुष, युग प्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के पावन सान्निध्य में मनाएं गए 160वें मर्यादा महोत्सव के अद्भुत क्षण कैमरे में हुए कैद ।

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*📿 युगप्रधान की यशस्वी यात्रा : आचार्य श्री महाश्रमण मुंबई यात्रा वृतांत के कवर पेज का मर्यादा महोत्सव के अवसर पर लोकार्पण*



*🏵️ तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" का तृतीय दिवस (मुख्य दिवस) : वाशी , नवी मुम्बई*

*🍁 संघ की संस्थाओं के लिए बरसी करुणा निधान की करुणा*

*♦️ पूज्य गुरुदेव ने उपासक श्रेणी, ज्ञानशाला, किशोर मण्डल, युवक परिषद्, कन्या मण्डल, महिला मण्डल, तेरापन्थ प्रोफेशनल फोरम, जैन विश्व भारती, अणुव्रत विश्व भारत सोसायटी, प्रेक्षा विश्व भारती, प्रेक्षा इंटरनेशनल प्रेक्षा फाउंडेशन, अमृत वाणी, अणुव्रत न्यास, भिक्षु समाधि स्थल संस्थान - सिरियारी, आचार्य तुलसी शान्ती प्रतिष्ठान का विशेष उल्लेख करते बौद्धिक माला से सम्बोधित करते हुए उनके विकास की मंगलकामना की ।*

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गुरुवार, फ़रवरी 15, 2024

160 वें मर्यादा महोत्सव का द्वितीय दिवस


*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में मनाया जा रहा है तेरापंथ का महाकुंभ "मर्यादा महोत्सव"*

*📿 गुरुदेव के मुखारविंद से नमस्कार महामंत्रोच्चार के साथ द्वितीय दिवस के कार्यक्रम का शुभारंभ*

*🌀 मुमुक्षु बहिनों द्वारा भावपूर्ण प्रस्तुति*
*"श्री भिक्षु का यह शासन है, प्राण अनुशासन है। "* 





👉🏻 *160 वां मर्यादा महोत्सव - द्वितीय दिवस*

*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में वाशी - मुम्बई में मनाया जा रहा है तेरापंथ का महाकुंभ "160 वां मर्यादा महोत्सव"*

*🌀मुख्य मुनि श्री महावीरकुमार जी ने मर्यादा महोत्सव के उपलक्ष में दी सारगर्भित प्रस्तुति* 

*तेरापंथ के प्राण तत्व है - आज्ञा, अनुशासन और मर्यादा : मुख्य मुनिश्री महावीरकुमारजी*





*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में वाशी - मुम्बई में मनाया जा रहा है तेरापंथ का महाकुंभ "160 वां मर्यादा महोत्सव"*

*🌀पूज्य गुरुदेव ने आचार्य श्री महाप्रज्ञजी को उनके पदारोहण दिवस पर याद करते हुए फरमाया कि मर्यादा महोत्सव का आज मध्य दिन है । आज आचार्य महाप्रज्ञ जी का पदारोहण दिवस है। गुरुदेव तुलसी ने आचार्य महाप्रज्ञ का स्वयं पदाभिषेक किया, ये दोनों तेरापंथ के विशेष अतिरिक्त रूप के आचार्य है।* 

• 160 वर्षों की परंपरा को साक्षात देख कर मर्यादा के महाकुंभ में अभिस्नात हुआ संपूर्ण श्रावक समाज

• 160वां मर्यादा महोत्सव : वाशी बना काशी 

• द्वितीय दिवस के आयोजन की मनमोहक तस्वीरें


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*🏳️‍🌈अनुपम नजारा, अदभुत दृश्य*

*🔰मर्यादा महोत्सव के द्वितीय दिवस पुज्य प्रवर की अमृतवाणी सुनने उमड़ा जनसैलाब*

*♻️हजारो की संख्या में उपस्थित श्रावक समाज*




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में वाशी - मुम्बई में मनाया जा रहा है तेरापंथ का महाकुंभ "160 वां मर्यादा महोत्सव"*

*📿तेरापंथ विकास परिषद् की ओर से श्री पद्मचन्द जी पटावरी की भावाभिव्यक्ति के पश्चात तेरापन्थ महिला मंडल वाशी ने दी सामुहिक गीत की श्रद्धासिक्त प्रस्तुति*




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में वाशी - मुम्बई में मनाया जा रहा है तेरापंथ का महाकुंभ "160 वां मर्यादा महोत्सव"*

*📿चातुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति मुम्बई अध्यक्ष श्री मदनलाल तातेड़ की भावाभिव्यक्ति के पश्चात संस्था शिरोमणि महासभा अध्यक्ष श्री मनसुखलाल सेठिया ने महासभा अधिवेशन के संदर्भ में अभिव्यक्ति दी एवं महासभा टीम द्वारा प्रतिवेदन किया गया श्रीचरणों में निवेदित*



*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सान्निध्य में वाशी - मुम्बई में मनाया जा रहा है तेरापंथ का महाकुंभ "160 वां मर्यादा महोत्सव"*

*📿मर्यादा महोत्सव के अवसर पर ज्ञानशाला - मुम्बई की प्रशिक्षिकाओं एवं ज्ञानार्थियों द्वारा "श्रावक निष्ठा पत्र" थीम पर दी गई संवाद एवं गीत की प्रस्तुति*

*श्री जैन श्वेताम्बर तेरापंथी सभा - मुम्बई द्वारा मुम्बई की ज्ञानशालाओं की रिपोर्ट "अर्पण" पूज्यप्रवर को की गई निवेदित*




*📜 सूरत चातुर्मास 2024 के logo का अनावरण*



*📜 भुज कच्छ के लोगो, थीम सॉन्ग एवं बैनर का अनावरण*


बुधवार, फ़रवरी 14, 2024

160 वें मर्यादा महोत्सव का प्रथम दिन


 *📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*📿 पूज्य गुरुदेव द्वारा नमस्कार महामंत्रोच्चार के उच्चारण एवं आचार्य भिक्षु द्वारा लिखित ऐतिहासिक "मर्यादा पत्र" की स्थापना के पश्चात मर्यादा महोत्सव के शुभारंभ की घोषणा के साथ हुआ 160 वें मर्यादा महोत्सव का भव्य आगाज*


*🌀 हजारों की संख्या में श्रद्धालु श्रावक समाज बन रहा है ऐतिहासिक क्षणों का साक्षी*



*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*


*📿 मुनिश्री दिनेशकुमारजी द्वारा "मर्यादा गीत" के संगान के पश्चात उपासक श्रेणी द्वारा "हम उपासक साधना में आगे बढ़ते जाए" गीत की हुई श्रद्धासिक्त प्रस्तुति*




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*📿 मुनिश्री कमल कुमारजी दिल्ली चातुर्मास सम्पन्न कर द्रुतगति से मुम्बई में पहुंचकर पूज्यप्रवर के दर्शन कर प्रस्तुत की अपनी श्रद्धासिक्त भावाभिव्यक्ति*




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*📿 साध्वियों द्वारा सेवा केंद्र नियुक्ति हेतु निवेदन के क्रम में साध्वियों की ओर से साध्वी श्री जिनप्रभाजी ने पूज्यप्रवर से सेवा हेतु नियुक्तियां करने का किया निवेदन*

*तेरापंथ धर्मसंघ विलक्षण संघ, इसकी विलक्षणता का एक प्रमुख घटक है "सेवा" -- साध्वी श्री जिनप्रभाजी* 




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*📿 संतों द्वारा सेवा केंद्र नियुक्ति हेतु निवेदन के क्रम में संतों की ओर से मुनि श्री कुमारश्रमण जी ने पूज्यप्रवर से सेवा हेतु नियुक्तियां करने का किया निवेदन*

*मर्यादा को अक्षुण्ण बनाए रखने में सेवा का सबसे बड़ा योगदान - मुनि श्री कुमारश्रमण जी* 



*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*📿साध्वीवर्या जी द्वारा सेवा धर्म की महत्ता बतायी-*

*तेरापंथ को एकतन्त्र में बाँधनेवाला घटक है सेवा*

*संघ, संगठन की दीर्घजीविता व अखंडता के लिए महत्वपूर्ण तत्व है सेवा* 




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*

*पूज्य गुरुदेव ने चतुर्विध धर्मसंघ को प्रेरणा पाथेय प्रदान करते हुए संघ में साधना, संगठन, विधान, सेवा की महत्ता का किया विश्लेषण*




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में तेरापंथ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम का वाशी - नवी मुम्बई में हो रहा है आयोजन*


*तेरापंथ के महाकुंभ 160 वें मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिवस परमपूज्य गुरुदेव ने की सेवा केंद्र में सेवा देने हेतु घोषणा*





*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में आयोजित तेरापंथ धर्मसंघ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम के _प्रथम दिवस_ की चित्रमय झलकियाँ*




*📜 मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी के सानिध्य में आयोजित तेरापंथ धर्मसंघ के महाकुंभ "160 वें मर्यादा महोत्सव" के त्रिदिवसीय कार्यक्रम के _प्रथम दिवस_ की प्रमुख झलकियाँ*

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*160 वां मर्यादा महोत्सव : वाशी बना काशी* 


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साभार - अमृतवाणी