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शनिवार, मई 16, 2026

अणुव्रत ही ज्ञान का व्यावहारिक रूप: मुनिश्री उदित कुमार

अणुव्रत ही ज्ञान का व्यावहारिक रूप: मुनिश्री उदित कुमार

IIPA में 'भारतीय ज्ञान परंपरा और अणुव्रत' पर संगोष्ठी: पूर्व सचिव अतुल तिवारी और प्रो. गिरीश्वर मिश्र सहित कई दिग्गज रहे उपस्थित

चित्र: भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में आयोजित संगोष्ठी के मुख्य मुख्य अंश एवं उपस्थित प्रबुद्ध जन।

नई दिल्ली, 16 मई 2026: भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में आज 'Indian Knowledge System and Anuvrat' (भारतीय ज्ञान परंपरा और अणुव्रत) विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण और आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में बहुश्रुत मुनिश्री उदित कुमार जी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने प्रेरणादायी विचारों से पूरी सभा को नई दिशा दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ अणुव्रत समिति द्वारा गाए गए मंगल गीत से हुआ। इसके पश्चात अणुव्रत समिति, दिल्ली के अध्यक्ष श्री बाबूलाल गोलछा ने स्वागत वक्तव्य देकर सभी अतिथियों का अभिनंदन किया।

ज्ञान को जीवन में उतारना ही अणुव्रत

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बहुश्रुत मुनिश्री उदित कुमार जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और अणुव्रत के गहरे अंतर्संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा:

"भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ग्रंथों या दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक व्यावहारिक कला है। जब हम इस महान ज्ञान को अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे संकल्पों के माध्यम से उतारते हैं, तो वही अणुव्रत का रूप ले लेता है। आज के वैश्विक पर्यावरण संकट और मानसिक तनाव का एकमात्र समाधान हमारे इसी आत्म-अनुशासन और संयम में छुपा है।"

दिग्गजों ने रखे अपने विचार

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य शीर्ष विचारकों ने भी इस विषय के व्यावहारिक आयामों पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए:

  • श्री अतुल कुमार तिवारी, IAS (पूर्व सचिव, स्किल इंडिया - मुख्य अतिथि): उन्होंने कौशल और ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों के जुड़ाव पर विशेष बल दिया।
  • प्रो. गिरीश्वर मिश्र (पूर्व कुलपति, MGAHV): उन्होंने भारतीय चिंतन की प्रासंगिकता को आज के आधुनिक संदर्भ में विस्तार से समझाया।
  • प्रो. सुधा सिंह (विभागाध्यक्ष हिंदी, दिल्ली विश्वविद्यालय): उन्होंने साहित्य और समाज में अणुव्रत के सिद्धांतों की उपयोगिता को रेखांकित किया।
  • श्री अमिताभ रंजन (रजिस्ट्रार, IIPA): उन्होंने प्रशासनिक क्षेत्र में संयम, शुचिता और अनुशासन के महत्व को सराहा।

राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण में उपयोगी

कार्यक्रम का सफल संयोजन श्री अनिल धर मिश्रा द्वारा किया गया। उन्होंने मुनिश्री के पावन विचारों और विद्वानों के इस वैचारिक मंथन को बेहद ऊर्जावान और सामयिक बताते हुए कहा कि यह मंथन भविष्य में देश की राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी और मार्गदर्शक साबित होगा।