प्रज्ञापाथेय
रविवार, मई 17, 2026

जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय (लाडनूँ) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ

शिक्षा समाचार

जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय (लाडनूँ) में शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ

📍 लाडनूँ (राजस्थान) | सत्र: 2026-27
🏅 NAAC द्वारा 'A' ग्रेड से मान्यता प्राप्त (UGC Act 1956)

फोटो: जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय प्रवेश सूचना (सत्र 2026-27)

लाडनूँ। देश के प्रतिष्ठित उच्च शिक्षण संस्थानों में शुमार जैन विश्व भारती विश्वविद्यालय (डीम्ड टू बी यूनिवर्सिटी) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए विभिन्न स्नातक (UG), स्नातकोत्तर (PG), डिप्लोमा और पीएचडी पाठ्यक्रमों में प्रवेश की आधिकारिक घोषणा कर दी है।

“जहाँ संस्कार दृष्टि को आकार देते हैं और सपनों को साकार करते हैं।”

मूल्य आधारित आधुनिक शिक्षा और नैतिक सिद्धांतों के समन्वय के लिए विख्यात इस विश्वविद्यालय का परिसर पूरी तरह से हरित, सुरक्षित और अत्याधुनिक सुविधाओं से संपन्न है। यहाँ विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

🎓 उपलब्ध प्रमुख पाठ्यक्रम (Programs Offered)

BA B.Com B.Sc BNYS MA M.Sc Ph.D. 📜 सर्टिफिकेट कोर्स 📜 डिप्लोमा कोर्स

🌟 विश्वविद्यालय की मुख्य विशेषताएँ

  • मूल्य आधारित शिक्षा: संस्कारों के साथ आधुनिक शिक्षण।
  • समग्र विकास: छात्र-केंद्रित एवं करियर उन्मुख दृष्टिकोण।
  • वैश्विक दृष्टिकोण: हरित एवं सतत पर्यावरण अनुकूल परिसर।

🏫 विश्वस्तरीय सुविधाएँ (Facilities)

  • 📚 विशाल एवं समृद्ध पुस्तकालय
  • 🌸 सुंदर उद्यान और ध्यान केंद्र
  • 🌱 प्राकृतिक चिकित्सा एवं वेलनेस सेंटर
  • 🍽️ आधुनिक कैंटीन एवं जिम सुविधा

✨ विरासत का हिस्सा बनें — अपना भविष्य संवारें

📩 Email: jvbiladnun@gmail.com
📞 Phone: 01581-226110
🌐 Website: www.jvb.ac.in

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शनिवार, मई 16, 2026

अणुव्रत ही ज्ञान का व्यावहारिक रूप: मुनिश्री उदित कुमार

अणुव्रत ही ज्ञान का व्यावहारिक रूप: मुनिश्री उदित कुमार

IIPA में 'भारतीय ज्ञान परंपरा और अणुव्रत' पर संगोष्ठी: पूर्व सचिव अतुल तिवारी और प्रो. गिरीश्वर मिश्र सहित कई दिग्गज रहे उपस्थित



चित्र: भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में आयोजित संगोष्ठी के मुख्य मुख्य अंश एवं उपस्थित प्रबुद्ध जन।

नई दिल्ली, 16 मई 2026: भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (IIPA) में आज 'Indian Knowledge System and Anuvrat' (भारतीय ज्ञान परंपरा और अणुव्रत) विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस गरिमापूर्ण कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण और आध्यात्मिक मार्गदर्शक के रूप में बहुश्रुत मुनिश्री उदित कुमार जी उपस्थित रहे, जिन्होंने अपने प्रेरणादायी विचारों से पूरी सभा को नई दिशा दी।

कार्यक्रम का शुभारंभ अणुव्रत समिति द्वारा गाए गए मंगल गीत से हुआ। इसके पश्चात अणुव्रत समिति, दिल्ली के अध्यक्ष श्री बाबूलाल गोलछा ने स्वागत वक्तव्य देकर सभी अतिथियों का अभिनंदन किया।

ज्ञान को जीवन में उतारना ही अणुव्रत

संगोष्ठी को संबोधित करते हुए बहुश्रुत मुनिश्री उदित कुमार जी ने भारतीय ज्ञान परंपरा (IKS) और अणुव्रत के गहरे अंतर्संबंधों को रेखांकित किया। उन्होंने अपने उद्बोधन में कहा:

"भारतीय ज्ञान परंपरा केवल ग्रंथों या दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की एक व्यावहारिक कला है। जब हम इस महान ज्ञान को अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे संकल्पों के माध्यम से उतारते हैं, तो वही अणुव्रत का रूप ले लेता है। आज के वैश्विक पर्यावरण संकट और मानसिक तनाव का एकमात्र समाधान हमारे इसी आत्म-अनुशासन और संयम में छुपा है।"

दिग्गजों ने रखे अपने विचार

कार्यक्रम में उपस्थित अन्य शीर्ष विचारकों ने भी इस विषय के व्यावहारिक आयामों पर अपने महत्वपूर्ण विचार साझा किए:

  • श्री अतुल कुमार तिवारी, IAS (पूर्व सचिव, स्किल इंडिया - मुख्य अतिथि): उन्होंने कौशल और ज्ञान के साथ नैतिक मूल्यों के जुड़ाव पर विशेष बल दिया।
  • प्रो. गिरीश्वर मिश्र (पूर्व कुलपति, MGAHV): उन्होंने भारतीय चिंतन की प्रासंगिकता को आज के आधुनिक संदर्भ में विस्तार से समझाया।
  • प्रो. सुधा सिंह (विभागाध्यक्ष हिंदी, दिल्ली विश्वविद्यालय): उन्होंने साहित्य और समाज में अणुव्रत के सिद्धांतों की उपयोगिता को रेखांकित किया।
  • श्री अमिताभ रंजन (रजिस्ट्रार, IIPA): उन्होंने प्रशासनिक क्षेत्र में संयम, शुचिता और अनुशासन के महत्व को सराहा।

राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण में उपयोगी

कार्यक्रम का सफल संयोजन श्री अनिल धर मिश्रा द्वारा किया गया। उन्होंने मुनिश्री के पावन विचारों और विद्वानों के इस वैचारिक मंथन को बेहद ऊर्जावान और सामयिक बताते हुए कहा कि यह मंथन भविष्य में देश की राष्ट्रीय नीतियों के निर्माण के लिए अत्यंत उपयोगी और मार्गदर्शक साबित होगा।

शुक्रवार, मई 15, 2026

लाडनूँ में सजेगा ‘डिजिटल डिटॉक्स’ का महासंगम ; आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में विद्यार्थी सीखेंगे संयमित जीवन के गुर

लाडनूँ में सजेगा ‘डिजिटल डिटॉक्स’ का महासंगम ; आचार्य महाश्रमण के सान्निध्य में विद्यार्थी सीखेंगे संयमित जीवन के गुर
📍 लाडनूँ (राजस्थान) | दिनांक: 18, 19 व 20 मई

"मोबाइल की लत छोड़, आत्मसंयम से जुड़ेंगे विद्यार्थी; अणुविभा की नई पीढ़ी को स्क्रीन एडिक्शन से मुक्त करने की अनूठी पहल।"

लाडनूँ। डिजिटल युग की सबसे बड़ी चुनौती बन चुके 'स्क्रीन एडिक्शन' से नई पीढ़ी को मुक्त करने के लिए अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी (अणुविभा) ने एक निर्णायक और ऐतिहासिक पहल की है। अणुव्रत अनुशास्ता परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी की पावन गरिमामयी उपस्थिति में आगामी 18, 19 एवं 20 मई को जैन विश्व भारती परिसर, लाडनूँ में तीन दिवसीय “अणुव्रत डिजिटल डिटॉक्स (ADD) वर्कशॉप” का भव्य आयोजन होने जा रहा है।

अणुविभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रकल्प प्रभारी विनोद कोठारी ने बताया कि अणुव्रत के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि श्री मनन कुमार जी के पावन मार्गदर्शन तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रताप सिंह दूगड़ एवं महामंत्री मनोज सिंघवी के कुशल नेतृत्व में यह कार्यशाला विद्यालयी छात्रों (कक्षा 6 से 12) के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई है। इसका उद्देश्य केवल मोबाइल छुड़वाना नहीं बल्कि विद्यार्थियों में आत्मसंयम, सकारात्मक सोच और अनुशासित जीवनशैली के बीज बोना है।

🎯 कार्यशाला के मुख्य आकर्षण (ADD Highlights)

अणुव्रत डिजिटल डिटॉक्स (ADD) के राष्ट्रीय संयोजक रोशन सुराणा ने तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि यह तीन दिवसीय आयोजन पूरी तरह प्रयोगात्मक होगा। कार्यशाला के मुख्य स्तंभ निम्न रहेंगे:

📱 डिजिटल अनुशासन: स्क्रीन टाइम को आसानी से मैनेज करने की आधुनिक व व्यावहारिक तकनीक।
🧠 माइंड पावर: अवचेतन मन की असीम और सुप्त शक्तियों को जाग्रत करना।
🧘‍♂️ इनर पीस: योग, प्राणायाम और प्रेक्षाध्यान के माध्यम से मानसिक एकाग्रता का विकास।

🎤 विषय विशेषज्ञ एवं मार्गदर्शक सत्र

राष्ट्रीय प्रचार-प्रसार मंत्री पंकज दुधोडिया ने बताया कि आध्यात्मिक मार्गदर्शन हेतु पूज्य साधु-साध्वी एवं समणीवृंद उपस्थित रहेंगे। वहीं विषय विशेषज्ञ चिराग पामेचा, महावीर भटेवरा एवं अंबिका डागा डिजिटल एडिक्शन पर महत्वपूर्ण सत्र लेंगे। 20 मई का दिन बालिकाओं के लिए विशेष रहेगा, जिसमें गरिमा ऋषभ डाकलिया प्रेरक संबोधन देंगी। योग एवं जीवन विज्ञान का जिम्मा हनुमान शर्मा संभालेंगे।

तैयारियाँ जोरों पर: इस कार्यशाला को सफल बनाने के लिए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष व योगक्षेम वर्ष की राष्ट्रीय संयोजिका डॉ. कुसुम लुनिया, अणुव्रत समिति लाडनूँ अध्यक्ष शांतिलाल बैद, मंत्री राज कोचर, संगठन मंत्री नवीन नाहटा सहित अणुविभा / अणुव्रत समिति लाडनूँ की पूरी टीम पूरे उत्साह के साथ जुटी हुई है।
टैग्स: Anuvrat Digital Detox | Anuvibha | Anuvrat Anushasta Acharya Mahashraman | Ladnun News | Screen Addiction Solution
गुरुवार, जनवरी 01, 2026

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन परिचय श्रृंखला 1

ॐ  अ .भी .रा .शि.  को .नमः

तपस्वी मुनिश्री अमीचंद जी स्वामी जीवन  परिचय
श्रृंखला ( 1 ) दिनांक 2 अप्रैल 2020

उनका जन्म मेवाड़ " गलुँड " गांव के आंचलिया परिवार में हुआ । वे भरा पूरा समृद्ध कुटुंब, पत्नी -पुत्र छोड़ दीक्षित हुए। उनका दीक्षा संस्कार मुनि श्री हेमराज जी स्वामी के हाथों लावा सरदारगढ़ में विक्रम सम्वत 1873 मृगसर कृष्णा 6 को संपन्न हुआ। वे जपी- तपी- ध्यानी -अभिग्रही और प्रशांत संत थे। उनकी व्यवहारिकता, वचनमाधुर्य, चातुर्य और सेवा ने सहगामियों के मनो को जीत लिया ।उनकी तपस्या में विशेषता थी -समत्व की साधना । वे केवल भूखे प्यासे रहकर जिहृइंद्रिय- विजयी ही नहीं थे, शीतकाल में जहां राजस्थान की धरती में आदमी कांपने लगता है, कपड़े ओढ़ने के बाद भी कंप-कम्पी नहीं मिटती, वहां तपस्वी अमीचंद जी उत्तरीय पछेवङी- वस्त्र हटाकर, दरवाजे के सामने खड़े हो ,एक- एक प्रहर तक पिछली रात को अभिग्रह संकल्प के साथ खड़े- खड़े ध्यान जाप करते ।उष्ण काल में धूप आतापना लेते । सूर्य तापी तपते । गरम-गरम पत्थर शिला -पट पर लेट कर ध्यान योग साधते। यह सब वे स्वेच्छा सहिष्णुता के अभ्यास में किया करते । वर्षा काल में उनकी तपस्या का क्रम रहता दंस- मंस- परिषह- विजय ' । वे शरीर पर बैठे किसी मक्खी - मच्छर- चींटी आदि को नहीं हटाते  ।समत्व की साधना करते ।  चिंतन करते - यह कष्ट मेरे को होता है या शरीर को  ? क्या मैं शरीर हूं  ? मैं भिन्न हूं  , शरीर भिन्न है  । देखें, कैसे भिन्न है  ?  बस इस चिंतन योग में वे तप: प्रयोग करते ।

 महातपस्वी मुनि श्री अमीचंद जी स्वामी के बारे में श्रीमद् जयाचार्य  श्री क्या लिखते हैं जानने के लिए अगली पोस्ट में.........
क्रमश...

👉🏻मुनि श्री सागरमल जी स्वामी द्वारा लिखित पुस्तक
"जय जय जय महाराज" से साभार

 लिखने में किसी भी प्रकार की त्रुटि रही हो तो मिच्छामि दुक्कड़म🙏🏻

जैन स्मारक ' चुरू (राजस्थान) के फेसबुक पेज के जुडने के लिए लिंक का उपयोग करें |

https://www.facebook.com/groups/2088461091455165/

साभार : अभातेयुप जैन तेरापंथ न्यूज
शुक्रवार, दिसंबर 26, 2025

व्यक्तित्व विकास के सुनहरे सूत्र


यह आलेख मुख्य नियोजिका साध्वी विश्रुतविभा जी द्वारा 01 नवंबर 2020 को 'भिक्षु सभागार' में दिए गए प्रवचन पर आधारित है। इस प्रवचन का मुख्य विषय "व्यक्तित्व विकास के सुनहरे सूत्र" है।

व्यक्तित्व विकास के सुनहरे सूत्र

प्रस्तावना: जीवन की अभिलाषा

संसार के सभी जीव जीने की इच्छा रखते हैं; मृत्यु का वरण कोई नहीं करना चाहता। जैसा कि भगवान महावीर ने दशवैकालिक सूत्र में कहा है—"सब्बे जीवा इच्छंति जीविउं न मरिज्जिउं"। वेदों में भी 100 वर्ष तक स्वस्थ जीने, सुनने और देखने की कामना की गई है। प्रश्न यह है कि यह जीवन कैसा हो? हर व्यक्ति चाहता है कि उसका व्यक्तित्व आकर्षक हो और उसकी सराहना की जाए।

1. व्यक्तित्व का आधार: धन नहीं, व्यवहार

​अक्सर लोग मानते हैं कि अधिक धन से व्यक्तित्व प्रभावशाली बनता है, परंतु यह सत्य नहीं है। आदरणीया मुख्य नियोजिका जी ने दो बहनों के उदाहरण से इसे स्पष्ट किया:

  • ​एक धनाढ्य युवती जिसके पास महंगी ज्वेलरी और फोन है, यदि वह किसी से अहंकारपूर्वक बात करती है, तो उसका व्यक्तित्व आकर्षक नहीं लगेगा [13:00]।
  • ​वहीं एक सामान्य युवती जो शालीनता और विनम्रता से बात करती है, उसे हर कोई सम्मान देता है। अतः व्यक्तित्व का वास्तविक आधार हमारा व्यवहार है, धन नहीं [14:16]।

2. व्यक्तित्व के प्रकार

​मनोवैज्ञानिकों के अनुसार व्यक्तित्व के मुख्य रूप इस प्रकार हैं:

  • बाह्य व्यक्तित्व (Extrovert): रहन-सहन, खान-पान और वातावरण पर आधारित।
  • आंतरिक व्यक्तित्व (Introvert): यह दो प्रकार का होता है। एक कषाय (क्रोध, मान, माया, लोभ) पर आधारित, जो किसी को प्रिय नहीं लगता। दूसरा गुणों (करुणा, प्रेम, ईमानदारी, सेवा) पर आधारित, जो हर किसी को आकर्षित करता है [17:15]।
  • तेजस्वी व्यक्तित्व (Brightening Personality): वह व्यक्तित्व जो गुणों के कारण दमकता है।

3. व्यक्तित्व निर्माण: एक दीर्घकालिक साधना

​एक चीनी कहावत के अनुसार, भवन निर्माण में एक वर्ष और वृक्ष लगाने में दस वर्ष लगते हैं, परंतु एक व्यक्ति के निर्माण में सौ वर्ष (पूरा जीवन) लग सकते हैं। यह कार्य श्रमसाध्य है [22:44]। आचार्य तुलसी और आचार्य महाप्रज्ञ जी ने इसी दिशा में कार्य करते हुए ऐसे साधु और श्रावक तैयार किए जो संघ की निस्वार्थ सेवा कर सकें [23:46]।

4. भगवान महावीर के 'व्यक्तित्व विकास' के सूत्र

​आधुनिक 'पर्सनालिटी डेवलपमेंट' की कक्षाएं आज शुल्क लेकर जो सिखाती हैं, वह भगवान महावीर ने सदियों पहले मेघ कुमार को संयम के रूप में सिखाया था [26:43]:

  • संयमपूर्वक चलना (जयं चरे): अहिंसक दृष्टि रखकर चलना। चलते समय मन विचारों से खाली हो और ध्यान केवल गमन पर हो [29:11]।
  • संयमपूर्वक खड़े रहना (जयं चिट्ठे): खड़े होने का पोस्चर सही हो। केवल गर्दन मोड़ने के बजाय पूरे शरीर को मोड़कर देखना स्वास्थ्य की दृष्टि से भी उत्तम है [30:51]।
  • संयमपूर्वक सोना (जयं सये): सोने में भी जागरूकता हो ताकि किसी जीव की हिंसा न हो और शरीर का पोस्चर न बिगड़े [33:09]।
  • संयमपूर्वक खाना (जयं भुंजंतो): केवल स्वाद के लिए नहीं, अपितु स्वास्थ्य के लिए खाना। ऋतु के अनुसार सात्विक भोजन का चयन करना और अपनी जठराग्नि के अनुसार मात्रा का विवेक रखना [36:20]।
  • संयमपूर्वक बोलना (जयं भासंतो): सीमित और प्रभावशाली शब्दों का प्रयोग। मौन की महत्ता को समझना [38:22]।

5. मौन और वाणी का संयम

​महान व्यक्तित्वों ने मौन को अपनाया है। बर्टन रसेल और उनके मित्र का उदाहरण देते हुए बताया गया कि वे 30 साल तक साथ रहे पर वाणी का अपव्यय नहीं किया [40:58]। वर्तमान में आचार्य महाश्रमण जी भी इसी वाणी संयम के आदर्श हैं, जो अक्सर अपनी मुस्कुराहट या सिर हिलाकर ही उत्तर दे देते हैं, व्यर्थ नहीं बोलते [42:01]।

निष्कर्ष:

यदि हमें अपने व्यक्तित्व को गुणात्मक, आकर्षक और महनीय बनाना है, तो हमें अपनी हर क्रिया—चलने, बैठने, सोने, खाने और बोलने—में संयम के तत्व को जोड़ना होगा [43:12]।

यह आलेख जीवन को गुणों के आधार पर संवारने का एक मार्ग प्रशस्त करता है।

मंगलवार, जून 03, 2025

अनजान माता-पिता की अनजानी भूल

 


🖋️ अनजान माता-पिता की अनजानी भूल 🖋️

“जब तक जागेंगे, तब तक बहुत देर न हो जाए…”



0 से 2 वर्ष की उम्र — जीवन की नींव, भविष्य की बुनियाद।

पर क्या हम जान रहे हैं कि इसी संवेदनशील समय में प्लास्टिक जैसी अदृश्य विषाक्तता हमारे बच्चों के जीवन में ज़हर घोल रही है?


प्लास्टिक के खिलौने, बोतलें, चम्मच, चुसनी और न जाने कितनी चीज़ें — जिनसे हम अपने शिशु को सुरक्षित समझते हैं, वही उसके स्वास्थ्य, मस्तिष्क विकास और रोग प्रतिरोधक क्षमता को भीतर ही भीतर खोखला कर रही हैं।


यह कोई कल्पना नहीं, अनुसंधान पर आधारित सत्य है।


आज "समय का चक्र" फिर वहीं आ खड़ा हुआ है, जहाँ हमें विरासत की गोद में लौटना होगा — ऑर्गेनिक लकड़ी, ऑर्गेनिक रंग, मिट्टी के खिलौने, कपड़े की गुड़िया, ताँबे-पीतल के बर्तन और प्राकृतिक संसाधनों की ओर।


यह केवल कहानी नहीं, चेतावनी है।

आइए, हम जागें — औरों को जगाएँ। अपने बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए प्लास्टिक से तौबा करें।


एक निवेदन — इस संदेश को अपने अपनों तक पहुँचाएँ।

स्वस्थ बचपन, सशक्त राष्ट्र की नींव है।


Klappy Toys CEO CA PRANJUL JAIN ने ऑर्गेनिक खिलौनों के क्षेत्र में बहुत बड़ा इनोवेशन किया है .. एक पॉडकास्ट के माध्यम से  CA  प्रांजुल जैन छोटे बच्चों के लिए प्लास्टिक कैसे हानिकारिक है बता रहे है । आप जरूर इस पूरे वीडियो को सुने देखे ।


https://youtu.be/h1ODRoVEpaI?si=rd5YVz93aRvo8NIY


वेबसाईट लिंक

https://klappytoys.com/


शनिवार, अप्रैल 12, 2025

धार्मिकता - आध्यात्मिकता से भावित हो मानव जीवन : अणुव्रत अनुशास्ता आचार्य श्री महाश्रमण


गुरुवार, मार्च 13, 2025

महा-रिकॉर्ड: अभातेयुप लगातार 108 घंटे रक्तदान शिविर के लिए 'India Book of Records' से सम्मानित

महा-रिकॉर्ड: अभातेयुप लगातार 108 घंटे रक्तदान शिविर के लिए 'India Book of Records' से सम्मानित

कोलकाता, हावड़ा एवं सबर्बन परिषदों के ऐतिहासिक पुरुषार्थ को मुनि श्री जिनेश कुमार जी के सानिध्य में मिला राष्ट्रीय सम्मान

अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद (अभातेयुप) के तत्वावधान में कोलकाता, हावड़ा एवं सबर्बन की समस्त परिषदों द्वारा आयोजित लगातार 108 घंटे तक चलने वाले महा-रक्तदान शिविर ने सफलता का नया इतिहास रच दिया है। संपूर्ण तेरापंथ समाज और अभातेयुप के लिए यह अत्यंत गौरव का पल है, क्योंकि इस अभूतपूर्व सेवा यज्ञ को 'India Book of Records' द्वारा आधिकारिक रूप से सम्मानित किया गया है।

यह गरिमापूर्ण सम्मान समारोह परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री जिनेश कुमार जी के पावन सानिध्य में आयोजित हुआ, जहां मुनिश्री के शुभाशीष के बीच इस राष्ट्रीय उपलब्धि की घोषणा की गई।

India Book of Records की ओर से आधिकारिक निर्णायक (Adjudicator) सीमा मनिकोट ने यह प्रतिष्ठित सम्मान अभातेयुप को प्रदान किया। इस ऐतिहासिक कीर्तिमान और प्रमाण पत्र को स्वीकार करने के लिए केंद्रीय अभातेयुप टीम एवं स्थानीय तेयुप के वरिष्ठ प्रतिनिधि, पदाधिकारी और कर्मठ कार्यकर्ता विशेष रूप से उपस्थित रहे।

सहयोगियों का जताया आभार

गौरतलब है कि इस विराट मानवतावादी सेवा कार्य को निर्बाध रूप से 108 घंटों तक सफल बनाने में यूको बैंक (UCO Bank), वरिष्ठ समाजसेवी श्री कमल ललवानी जी, लोकप्रिय मीडिया पार्टनर RJ प्रवीण सहित विभिन्न केंद्रीय संस्थाओं एवं स्थानीय जैन श्वेतांबर तेरापंथ समाज की सभी संस्थाओं के सम्मानित पदाधिकारियों व ऊर्जावान कार्यकर्ताओं का अतुलनीय और अनुकरणीय सहयोग रहा।

आधिकारिक रिकॉर्ड लिंक्स देखें:

India Book of Records Website India Book of Records Facebook
मंगलवार, फ़रवरी 04, 2025

161 वां मर्यादा महोत्सव 2025 का तृतीय दिन


161वें मर्यादा महोत्सव के शिखर दिवस पर तेरापंथ के शिखरपुरुष ने दिया धर्मसंघ को संदेश

साधु-साध्वी व समणीवृंद ने गीत के माध्यम से संघ को किया वर्धापित

साध्वीप्रमुखाजी ने भी जनता को अनुशासन के प्रति किया उत्प्रेरित

अनेक घोषणाओं आदि का साक्षी बना भुज का स्मृतिवन

दीक्षा में उम्र की सीमा को शांतिदूत ने किया समाप्त

04.02.2025, मंगलवार, भुज, कच्छ (गुजरात), भुज का ऐतिहासिक स्मृतिवन परिसर में बने जय मर्यादा समवसरण के विशाल पण्डाल में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के 161वें मर्यादा महोत्सव के त्रिदिवसीय आयोजन का शिखर दिवस। गुजरात के प्रथम मर्यादा महोत्सव के अंतिम दिवस। चतुर्विध धर्मसंघ की विराट उपस्थिति। निर्धारित समय पर तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगलवाणी से उच्चरित मंगल महामंत्रोच्चार के साथ भव्य कार्यक्रम का शुभारम्भ हुआ। मुनि दिनेशकुमारजी ने जयघोष कराया। जयघोष से पूरा स्मृतिवन गुंजायमान हो रहा था। मुनि दिनेशकुमारजी ने ‘मर्यादा गीत’ का संगान कराया। 


समणीवृंद ने गीत का संगान किया। आज के अवसर पर साध्वीवृंद ने अपनी गीत को प्रस्तुति दी। तदुपरान्त मुनिवृंद ने भी मर्यादा महोत्सव के शिखर दिवस पर गीत के माध्यम से अपनी भावनाओं को अभिव्यक्ति दी। गीतों की प्रस्तुति के उपरान्त तेरापंथ धर्मसंघ की नवीं साध्वीप्रमुखा विश्रुतविभाजी ने चतुर्विध धर्मसंघ को उद्बोधित करते हुए विभिन्न प्रेरणाएं प्रदान कीं। 


मर्यादा महोत्सव के शिखर दिवस पर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान शिखरपुरुष, महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने समुपस्थित जनता को अपनी अमृतवाणी का रसपान कराते हुए कहा कि हम धर्म से जुड़े हुए हैं। आज हम एक धर्मसंघ के मर्यादा महोत्सव समारोह से भी जुड़े हुए हैं। भगवान महावीर के इस शासन में अनेक आम्नाय हैं। दिगम्बर हैं, श्वेताम्बर हैं। श्वेताम्बर परंपरा में भी अनेक संप्रदाय हैं, उनमें से एक है तेरापंथ धर्मसंघ। हमारे तेरापंथ धर्मसंघ का संस्थापन वि.सं. 1817 में हुआ था। आज वर्तमान में इस धर्मसंघ को शुरु हुए 264 वर्ष संपन्न हो चुके हैं। हमारे धर्मसंघ के आदि अनुशास्ता भिक्षु स्वामी हुए। वे हमारे धर्मसंघ के पिता हैं और हम सभी उनकी संतानें हैं। उन्होंने धर्मसंघ की स्थापना की और उन्होंने मर्यादाएं भी बनाईं। उनकी एक लिखित मर्यादा पत्र वि.सं. 1859 का प्राप्त होता है। आचार्यश्री ने उस पत्र को दिखाते हुए कहा कि यह पत्र मानों हमारा गणछत्र है। इससे संदर्भित आज का यह मर्यादा महोत्सव आयोजित हो रहा है। मर्यादा महोत्सव का प्रारम्भ प्रज्ञापुरुष श्रीमज्जयाचार्य ने किया था। वि.सं. 1919 में राजस्थान के बालोतरा से हुआ। हमारे धर्मसंघ ने अतीत में दस आचार्यों का शासनकाल देख लिया है। यह मर्यादाओं का महोत्सव है। भारत के संविधान के अनुसार 26 जनवरी भारत का मर्यादा महोत्सव है और हमारे धर्मसंघ का मर्यादा महोत्सव चल रहा है। इसके माध्यम से न्यारा में चतुर्मास करने वाले चारित्रात्माओं को गुरुदर्शन और सेवा में रहने का अवसर मिल जाता है। 


इसमें एक आचार्य के नेतृत्व में रहने की व्यवस्था है। इसमें एक आचार्य का ही विधान है। आचार्य की आज्ञा से ही साधु-साध्वियां विहार-चतुर्मास करते हैं। इस नियम में 265 वर्षों में आज तक कोई परिवर्तन नहीं हुआ। हमारे यहां साधु-साध्वियां भी हैं और समणश्रेणी भी हैं। परम पूज्य आचार्यश्री तुलसी के समय इस श्रेणी का प्रारम्भ हुआ है। ये साध्वियां तो नहीं हैं, किन्तु अनेक अंशों में साध्वियों के समान ही हैं। ये वाहन का यथाविधि उपयोग कर सकती हैं। देश-विदेश में जा सकती हैं और धर्म प्रचार कर सकती हैं। आचार्यों की दृष्टि के बिना आज तक कोई चतुर्मास नहीं हुए हैं। जहां आचार्य विहार के लिए कह दें, वहां विहार करने की मर्यादा है। कोई भी साधु-साध्वी अपना-अपना शिष्य-शिष्याएं न बनाएं। कभी-कभी साधु-साध्वी आचार्य की दृष्टि से दीक्षा तो सकते हैं, किन्तु वह शिष्य तो आचार्य का ही होता है। आचार्यश्री भी योग्य व्यक्ति को दीक्षित करते हैं और कोई दीक्षा के बाद भी अयोग्य निकले तो उसे गण से बाहर कर सकते हैं। योग्यता देखकर ही दीक्षा देनी चाहिए। आचार्य अपने गुरुभाई या शिष्य को अपना उत्तराधिकारी चुने तो उसे सभी साधु-साध्वियां सहर्ष स्वीकार करते हैं। पूरे धर्मसंघ में इन पांच मर्यादाओं का सम्यक् और दृढ़ता के साथ पालन हो रहा है। आचार्यश्री ने ‘हमारे भाग्य बड़े बलवान, मिला यह तेरापंथ महान’ गीत का आंशिक संगान किया। 


आचार्यश्री ने आगे कहा कि साधु-साध्वियों रूपी गण को प्रणमन करता हूं। हमारे पूर्वाचार्यों ने मर्यादाओं में विस्तार भी किया है। संन्यास व साधुता के प्रति पूर्ण जागरूकता रहे। हमारे धर्मसंघ में साधु-साध्वियां, समणियां और श्रावक-श्राविकाएं भी हैं। इनके साथ हमारी अनेक संस्थाएं भी हैं। केन्द्रीय हैं और स्थानीय और प्रान्तीय स्तर पर भी होती हैं। कितनी हमारी केन्द्रीय संस्थाएं कितनी अनुशासित और जागरूक होती हैं। जिनका कार्य बहुत व्यवस्थित प्लानिंग, योजना और फिर उसकी क्रियान्विति भी होती हैं। ये संस्थाएं समाज के सौभाग्य की बात है। कल्याण परिषद एक ऐसा मंच है, जहां योजनाओं पर निर्णय होता है और उसका पालन भी होता है। विकास परिषद भी है, वह भी कल्याण परिषद के अंतर्गत ही है। 


समाज की कई गतिविधियां भी बहुत उपयोगी हैं। ज्ञानशाला के माध्यम से छोटे-छोटे बच्चों को धार्मिक ज्ञान देने का बहुत सुन्दर उपक्रम है। महासभा के तत्त्वावधान में चलने वाली इस ज्ञानशाला में सभाएं और फिर अनेक संस्थाएं जुड़ी हुई होती हैं, बहुत अच्छा क्रम देखने को मिल रहा है। ज्ञानशाला और ज्ञानार्थियों की संख्या भी बढ़े तो बालपीढी के लिए बहुत उपयोगी हो सकता है। 


उपासकश्रेणी भी महासभा के तत्त्वावधान में चल रही है। आज इतने उपासक-उपासिकाएं बन गए हैं। उपासक-उपासिकाओं की संख्या भी बढ़े। पर्युषण में उनका अच्छा उपयोग हो और कभी संथारे की बात हो, जहां साधु-साध्वियां न हों, समणियां न हों तो उपासक-उपासिकाएं संथारा करा सकते हैं अणुव्रत आन्दोलन, प्रेक्षाध्यान और जीवन विज्ञान जो हमारी गैर संप्रदायिक और लोककल्याणकारी प्रवृत्तियां हैं, जो गुरुदेव तुलसी के समय से चल रही हैं। इनके माध्यम से जन-जन का कल्याण हो सकता है। 


दीक्षा में उम्र संबंधी बाधा हुई समाप्त


161वें मर्यादा महोत्सव के अवसर पर आचार्यश्री महाश्रमणजी ने धर्मसंघ को संबोधित करते हुए कहा कि मैंने पहले पुरुषों की दीक्षा में 50 वर्ष की सीमा लगी हुई थी। उसे आचार्यश्री ने खोलते हुए कहा कि जिस अवस्था के व्यक्ति की दीक्षा की इच्छा होगी, यदि वह हमारी कसौटियों पर खरा उतरेगा, उसे दीक्षा प्रदान की जा सकती है। 


अहमदाबाद चतुर्मास में दीक्षा समारोह की घोषणा


मुमुक्षु कल्प मेहता, मुमुक्षु प्रीत कोठारी, मुमुक्षु मोहक बेताला, मुमुक्षु मनीषा, मुमुक्षु प्रेक्षा, मुमुक्षु राजुल, मुमुक्षु भावना, मुमुक्षु कीर्ति भाद्रव शुक्ला एकादशी 3 सितम्बर 2025 को चतुर्मास स्थल में दीक्षा समारोह के दिन इन आठ मुमुक्षुओं को मुनि व साध्वी दीक्षा देने का भाव है। मुमुक्षु भाविका, मुमुक्षु बिनू, मुमुक्षु अंजलि और मुमुक्षु साधना को उसी दीक्षा समारोह में समणी दीक्षा देने का भाव है। वैरागी श्री मनोज संकलेचा को साधु प्रतिक्रमण सीखने की स्वीकृति प्रदान की। 


स्वरचित गीत का युगप्रधान आचार्यश्री ने किया संगान


मर्यादा महोत्सव के अवसर पर तेरापंथ अधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने स्वरचित गीत ‘करें हम आध्यात्मिक उत्थान रे, शुभ ध्यान रे, जैनागम वाङ्मय का’ संगान किया। अपने आराध्य के साथ चतुर्विध धर्मसंघ ने इस गीत का संगान किया। 


मर्यादा पत्र का तेरापंथ के अनुशास्ता ने किया वाचन


गीत संगान के उपरान्त आचार्यश्री ने मर्यादा महोत्सव के आधार ‘मर्यादा पत्र’ का वाचन किया। साधु-साध्वियों ने तन्मयता के साथ उसका अनुश्रवण किया। यह वही मर्यादा पत्र है, जिसकी मर्यादा के आधार पर तेरापंथ शासन का संचालन होता है। राजस्थानी भाषा में लिखित इस मर्यादा पत्र को आचार्यश्री ने वाचन करते हुए चारित्रात्माओं को त्याग भी कराया। 43 साधु और 53 साध्वियां और 43 समणियों की उपस्थिति रही। 


तदुपरान्त विशाल प्रवचन पण्डाल में एक ओर संतवृंद, दूसरी ओर साध्वीवृंद और मध्य में समणीवृंद ने पंक्तिबद्ध होकर लेखपत्र का उच्चारण किया। तेरापंथ धर्मसंघ की मर्यादा, अनुशासन व व्यवस्था की इस नयनाभिराम दृश्य को देखकर भुज की धरा ही नहीं उपस्थित हजारों नेत्र हर्षान्वित और गौरवान्वित हो रही थीं। उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं को आचार्यश्री ने ‘श्रावक निष्ठा पत्र’ का वाचन कराया। जो श्रावक-श्राविकाओं के वाचन से पूरा वातावरण गुंजायमान हो उठा। 


आचार्यश्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में साधु-साध्वियों के विहार चतुर्मासों की घोषणा की। साथ ही आचार्यश्री ने विदेशों और देश के अन्य हिस्सों में स्थित श्रावक समाज को लाभान्वित करने के लिए सेण्टर्स व उपकेन्द्र की घोषणा की। 


आचार्यश्री ने आगे प्रेरणा प्रदान करते हुए कहा कि तेरापंथ समाज कही भी रहे, कहीं भी जाए, नॉनवेज व शराब आदि के सेवन से बचने का प्रयास करना चाहिए। अपनी निंदा का जवाब अपने अच्छे कार्यों से देने का प्रयास करना चाहिए। संयम के साथ अपना अच्छा कार्य करने का प्रयास करना चाहिए। समाज की संस्थाओं में नैतिकता रखने का प्रयास करना चाहिए। मैत्री और शुद्ध भावना रखना ही धर्म है। दूसरों का कल्याण हो, इसके लिए दूसरों की सेवा का भी प्रयास करना चाहिए। साध्वीप्रमुखाजी, साध्वीवर्याजी और मुख्यमुनि महावीर धर्मसंघ को अपनी सेवाएं दे रहे हैं। और भी साधु-साध्वियां चाहे गुरुकुलवास में हों या न्यारा में वे अपने कार्यों में ध्यान देते हैं। कई संत बहुत अच्छी सेवा दे रहे हैं। संत कई संस्थाओं के आध्यात्मिक पर्यवेक्षक के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं। बहुत कर्मठता से अपनी सेवा दे रहे हैं। कई साध्वियां आगम के कार्य और अन्य सेवा के कार्य से जुड़ी हुई हैं। सभी अपने कार्य मंे जुटे रहें। 


आचार्यश्री पट्ट से नीचे खड़े हुए तो अपने आराध्य के साथ चतुर्विध धर्मसंघ खड़ा हुआ और संघगान प्रारम्भ किया। संघगान से पूरा स्मृतिवन गूंज रहा था। इसके साथ ही आचार्यश्री ने भुज-कच्छ में आयोजित 161वें मर्यादा महोत्सव के त्रिदिवसीय समारोह की सम्पन्नता की घोषणा भी की। इस प्रकार ऐतिहासिक भूमि पर तेरापंथ धर्मसंघ का ऐतिहासिक सुसम्पन्न हुआ। 

"तेरापंथ धर्मसंघ का महाकुंभ 161 वाँ मर्यादा महोत्सव" - भुज (कच्छ)- तृतीय दिवस

मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी द्वारा नमस्कार महामंत्र के समुच्चारण के साथ मर्यादा महोत्सव के तृतीय दिवस के मुख्य कार्यक्रम का हुआ शुभारम्भ

पूज्यप्रवर द्वारा आज होगी साधु - साध्वियों के चातुर्मास क्षेत्र की घोषणाएं


बहुश्रुत परिषद सदस्य मुनिश्री दिनेशकुमारजी द्वारा जय घोष एवं "भीखण जी स्वामी भारी मर्यादा बांधी गीत के संगान के पश्चात समणी वृंद द्वारा "गुरु भुज मां आव्या" गीत की हुई श्रद्धासिक्त प्रस्तुति


मर्यादा महोत्सव के अवसर पर साध्वीवृंद द्वारा "भिक्षु का आसन - भिक्षु का शासन" गीत की हुई श्रद्धासिक्त प्रस्तुति


मर्यादा महोत्सव के अवसर पर मुनिवृन्द द्वारा "विघ्नविनायक मंगलदायक स्वामीजी का जय नारा" गीत की हुई श्रद्धासिक्त प्रस्तुति


मर्यादा महोत्सव के संदर्भ में साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी ने "मर्यादा और अनुशासन" विषय पर किया उपस्थित जन मेदनी को सम्बोधित

जहाँ मर्यादा होती है वहाँ विकास, सफलता और महानता स्वतः आ जाती है : साध्वीप्रमुखा श्री विश्रुतविभाजी


पूज्य गुरुदेव मर्यादा महोत्सव के अवसर पर चतुर्विध धर्मसंघ को प्रदान कर रहे है प्रेरणा पाथेय

पुज्य गुरुदेव ने आचार्य भिक्षु द्वारा लिखित ऐतिहासिक मर्यादा पत्र को दिखाते हुए मर्यादाओं की महत्ता पर डाला प्रकाश

तेरापंथ में पांच बातों में एकता है । वे है "एक आचार, एक विचार, एक आचार्य, एक विधान और एक सुगुरु  : आचार्य श्री महाश्रमणजी


हमारे संघ में मर्यादा शिरोमणि है । हमारी मुख्य पांच मर्यादाएं है : आचार्य श्री महाश्रमणजी


पुज्य गुरुदेव युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी द्वारा 161 वें मर्यादा महोत्सव के उपलक्ष में सम्मुचरित गीत


परम पूज्य आचार्य श्री महाश्रमणजी ने महत्ती कृपाकर मर्यादा महोत्सव के अवसर पर निम्न लिखित मुमुक्ष भाई बहिनों की दीक्षा दिनांक 3-9-2025, बुधवार, भाद्रव शुक्ला एकादशी को प्रेक्षा विश्व भारती, कोबा (अहमदाबाद) में देने का फरमाया है।


मर्यादा के शिखर पुरुष आचार्य श्री महाश्रमणजी ने आचार्य श्री भिक्षु द्वारा लिखित ऐतिहासिक मर्यादापत्र का किया वांचन । सभी उपस्थित साधु साध्वियों ने मर्यादा पत्र में उल्लेखित संकल्पों का किया उच्चारण।


मर्यादा महोत्सव के अवसर पर हाजरी वांचन का अद्भुत दृश्य देख श्रावक - श्राविका समाज हुआ अभिभूत

पूज्य गुरुदेव द्वारा समुच्चरित मर्यादाओं के लेखपत्र का पंडाल के दोनों ओर पंक्ति बद्ध खड़े साधु - साध्वी वृंद ने पुनः किया उच्चारित


तेरापंथ धर्मसंघ में मर्यादा, अनुशासन और एकता का दिव्य संगम – 161वें मर्यादा महोत्सव के महाकुंभ का तृतीय दिवस उल्लासपूर्वक संपन्न


सोमवार, फ़रवरी 03, 2025

मर्यादा महोत्सव : उदयपुर


उदयपुर में तेरह चारित्रात्माओ के सान्निध्य में तेरापंथ धमिसंघ ने मनाया 161 वाँ मर्यादा महोत्सव 

बहुश्रुत मुनिश्री उदित कुमार का उदयपुर में आगमन

तेरापंथ धर्मसंघ का 161 वाँ मर्यादा महोत्सव का शहर के तेरापंथ सभा भवन अणुव्रत चौक में तेरापंथ सभा के तत्वावधान में तेरह साधु-साध्वीयों के सान्निध्य में मुनिवृन्द के नमस्कार महामंत्रोच्चारण के साथ भव्य आगाज हुआ शासन श्री मुनि सुरेश कुमार ने तेरापंथ धर्मसंघ का आधार मर्यादा पत्र का वाचन करते हुए कहा आचार्य भिक्षु ने जब मर्यादाओं का सृजन किया तब इस महोत्सव का समायोज न नहीं होता था यह श्रीमद जयाचार्य की सुझबुझ की परिणति है। मुनि ने मर्यादा पत्र का वाचन करते हुए कहा- यह मर्यादा पत्र नहीं तेरापंथ धर्म संघ का सुरक्षा छत्र है। मुनि ने इस अवसर पर तेरापंथ शासन पाया रे भाग्य बड़े बलवान गीत प्रस्तुत किया ।

मुनि मुनिसुव्रत कुमार ने कहा- तेरापंथ धर्मसंध जैसा पुण्यशाली धर्मसंध पाकर कौन अपने सौभाग्य की सराहना नहीं करेगा। मुनि ने "भिक्षु शासन की महिमा अपार हैं। सुमधुर गीत का संगान करते हुए कहा- जो मर्यादा का शुद्ध पालन करता है वह सृष्टि के लिए पुज्य हो जाता है।

बहुश्रुत परिषद् सदस्य व ज्ञानशाला आध्यात्मिक पर्यवेक्षक मुनि उदित कुमार ने कहा- दीक्षीत होने के बाद जीवन भर मानसिक व शारिरीक तौर पर निश्चिंत करना ही तेरापंथ धर्मसंघ की मिसाल है। अनुशासन, समर्पण का यह उत्सत केवल तेरापंथ में ही हो सकता है।मुनि ने सेवा के विभिन्न आयामों पर विश्लेषण किया।

साध्वी सम्यकप्रभा ने कहा-तेरापंथ धर्मसंघ की तेजस्विता का आधार है अनुशासन । बहुत सहज है औरो पर अनुशासन करना किन्तु जो स्वयं पर शासन करना सीख ले वही नायक है। 

मुनिवृंद की और से मुनि सम्बोध कुमार 'मेधांश' मुनि मंगल प्रकाश, मुनि रम्य कुमार, मुनि ज्योतिर्मय, मुनि शुभम कुमार, मुनि सिद्धप्रज्ञ ने समुहगान, साध्वी वृंद की ओर से साध्वी सौम्यप्रभा, साध्वी मलय प्रभा, साध्वी दीक्षीत प्रभा ने समुहगान से मर्यादा की प्रेरणा दी।

कार्यक्रम में ट्राइबल विभाग निदेशक ओ. पी. जैन ने श्रावक निष्ठा व पत्र का वांचन करते हुए श्रावक समाज को संघीय निष्ठा की शपथ दिलाइ । इस अवसर पर तेरापंथ महिला मंडल व तेरापंथ युवक परिषद् ने समूह गान की प्रस्तुति दी तेरापंथ सभा अध्यक्ष कमल नाहटा, सभा मंत्री अभिषेक पोखरणा , ते. यु.प अध्यक्ष भुपेश खमेसरा, महिला मंडल अध्यक्षा सीमा बाबेल ने भावपूर्ण विचारो की अभिव्यक्ति दी। आभार सभा उपाध्यक्ष आलोक पगारिया ने किया। मंच संचालन मुनि सम्बोध कुमार 'मेधांश' ने किया। कार्यक्रम का समापन संघ गान व मुनि सुरेश कुमार के मंगलपाठ से हुआ।





161 वां मर्यादा महोत्सव 2025 का द्वितीय दिन

आज्ञा, मर्यादा, आचार्य, गण और धर्म में समाहित है मर्यादा महोत्सव का सार : आचार्य महाश्रमण

161वें मर्यादा महोत्सव का दूसरा दिवस

आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के पट्टोत्सव पर आचार्यश्री ने किया श्रद्धा स्मरण

मुख्यमुनिश्री ने जनता को किया उद्बोधित

श्रद्धालुओं ने श्रीचरणों में प्रस्तुत की अनेक प्रस्तुतियां
 


03.02.2025, सोमवार, भुज, कच्छ (गुजरात), भुज की धरा पर गुजरात का प्रथम तथा जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ का 161वां मर्यादा महोत्सव। भुज के ऐतिहासिक स्मृतिवन के प्रांगण में बने जय मर्यादा समवसरण में भव्य आयोजन। सोमवार को मर्यादा महोत्सव का दूसरा दिन। निर्धारित समयानुसार तेरापंथ धर्मसंघ के ग्यारहवें अनुशास्ता, भगवान महावीर के प्रतिनिधि, अध्यात्मवेत्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी मंच के मध्य विराजमान हुए और मंगल महामंत्रोच्चार करते हुए दूसरे दिवस का मंगल शुभारम्भ किया। 

आज के आयोजन में सर्वप्रथम मुमुक्षु बहनों ने गीत का संगान किया। तदुपरान्त मुख्यमुनिश्री महावीरकुमारजी ने समुपस्थित विशाल जनमेदिनी को उद्बोधित किया। तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अनुशास्ता, युगप्रधान आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मर्यादा महोत्सव के दूसरे दिन अपनी अमृतमयी वाणी से अमृतवर्षा करते हुए कहा कि पांच शब्द हैं-आज्ञा, मर्यादा, आचार्य, गण और धर्म। इन पांच शब्दों में मार्यादा महोत्सव, साधुता, संगठन की सफलता के तत्त्व सन्निहित हैं। मैं आज्ञा की सम्यक् आराधना करूंगा। आज्ञा के प्रति एक समर्पण का भाव होना, सफलता का महत्त्वपूर्ण सूत्र प्रतीत हो रहा है। जिसकी आज्ञा से आज्ञापालक का हित हो सकता है, उसकी आज्ञा का पालन करने का प्रयास होना चाहिए। जैन आगमों और शास्त्रों की आज्ञा का पालन करने का प्रयास करना चाहिए। जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ में 32 आगम मान्य हैं। आदमी को आगमों की आज्ञा पर ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए। शास्त्रों की वाणी के प्रति जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए। वर्तमान में तीर्थंकर उपलब्ध नहीं तो आचार्य उनके प्रतिनिधि के रूप में होते हैं। आचार्य की आज्ञा पर ध्यान देना चाहिए। तेरापंथ धर्मसंघ में आचार्य की आज्ञा का महत्त्वपूर्ण स्थान है। साधु-साध्वियों को ऐसा त्याग भी दिलाया जाता है कि ‘आचार्य की आज्ञा को लांघने का त्याग है।’ आचार्य की आज्ञा का लांघने का त्याग है, तो आचार्य की आज्ञा का कितना महत्त्व हो जाता है।

आचार्य की कड़ी दृष्टि को भी सहन करने का प्रयास करना चाहिए। सहन करने में हीरे के समान कठोर बनना चाहिए न कि कांच की भांति अधीर। गुरुओं की कठोर वाणी को सहन करने वाला ऊंचाई को प्राप्त कर सकता है। अपने अग्रणी की आज्ञा पर भी ध्यान देने का प्रयास करना चाहिए। अग्रणी साधु-साध्वी आचार्य के प्रतिनिधि होते हैं, इसलिए उनकी आज्ञा आदि का पालन करने का प्रयास करना चाहिए। आचार्यश्री ने युवाचार्यश्री जीतमलजी के प्रसंग का वर्णन किया। आज्ञा की आराधना सफलता का एक सूत्र है। 

दूसरी बात है मर्यादाओं के प्रति निष्ठा। मर्यादा का मान हम रखेंगे तो मानों मयार्दाएं हमारा मान रख सकेंगी। संगठन के मर्यादाओं के पालन के प्रति जागरूक रहने का प्रयास करना चाहिए। तीसरी बात बताई गई कि मैं आचार्य की सम्यक् आराधना करूंगा। आचार्य की आज्ञा ही नहीं, उनकी इंगित पर ध्यान देना और उसे समझने का प्रयास करना, उनके प्रति विनयपूर्ण व्यवहार रखना, अप्रमत्त रहकर आचार्य की सुसुश्रा करना बहुत अच्छी बात होती है। सेवा के प्रति जागरूकता के लिए मुनि खेतसीजी स्वामी के प्रसंगों का आचार्यश्री ने वर्णन किया। चौथी बताई गई कि गण का अनुगमन करना। संघ है तो संघ की सेवा की भावना भी रखनी चाहिए। जितना संभव हो सके, संघ की सेवा करने का प्रयास करना चाहिए। आवेश में कभी संघ को छोड़ना नहीं चाहिए। छूटे तो कभी यह शरीर छूट जाए, लेकिन संघ का परित्याग करने से बचने का प्रयास करना चाहिए। पांचवी बात बताई गई कि धर्म कभी नहीं छोडूंगा। अहिंसा, संयम और तप रूपी धर्म को कभी छोड़ना नहीं चाहिए। शरीर से प्राण भले छूट जाए, लेकिन धर्म को नहीं छोड़ना चाहिए। धर्म के प्रति ऐसी निष्ठा होनी चाहिए। 

आचार्यश्री ने आगे कहा कि आचार्यश्री तुलसी ने मुनिश्री नथमलजी स्वामी टमकोर को अपना युवाचार्य बनाया। आज माघ शुक्ला षष्ठी है। आचार्यश्री महाप्रज्ञजी का आचार्य पदारोहण दिवस है। आज के दिन आचार्यश्री तुलसी ने दिल्ली में उन्हें आचार्य पद पर प्रतिष्ठित हुए। ऐसा अवसर इस धर्मसंघ में एक ही बार आया कि अपने गुरु और आचार्य के रहते हुए ही आचार्य पद प्राप्त किया। आचार्य के छत्तीस गुण बताए गए हैं। उनका आयुष्य नब्बे वर्ष का रहा। उनका लम्बा संयम पर्याय रहा। हम आचार्यश्री महाप्रज्ञजी के प्रति श्रद्धा अभिव्यक्त करता हूं। आज मर्यादा महोत्सव का दूसरा दिन है। इस प्रकार हम सभी पांचों शब्दों के प्रति जागरूक रहें। 

मंगल प्रवचन के उपरान्त आचार्यश्री महाश्रमण मर्यादा व्यवस्था समिति के अध्यक्ष श्री कीर्तिभाई संघवी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। तेरापंथ समाज भुज-कच्छ ने संयुक्त रूप में गीत का संगान किया। भुज से संबद्ध मुनि अनंतकुमारजी ने अपनी आस्थासिक्त अभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। भुज ज्ञानशाला के ज्ञानार्थियों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति दी। जैन विश्व भारती के पदाधिकारियों द्वारा ‘शासनश्री साध्वी अशोकश्री पावन पथगामिनी’ पुस्तक आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की गई। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। 

संस्था शिरोमणि तेरापंथी महासभा के अध्यक्ष श्री मनसुखलाल सेठिया, अखिल भारतीय तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष श्री रमेश डागा, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के अध्यक्ष श्री हिम्मत माण्डोत, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष श्री अमरचंद लुंकड़, अणुव्रत विश्व भारती सोसायटी के अध्यक्ष श्री प्रताप दुगड़, विकास परिषद के सदस्य श्री पदमचन्द पटावरी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आगामी मर्यादा महोत्सव छोटी खाटू में आयोजित है। इस संदर्भ में छोटी खाटू तेरापंथ समाज अपना आमंत्रण लेकर गुरु सन्निधि में उपस्थित हुआ और गीत को प्रस्तुति दी। आचार्यश्री ने कहा कि छोटी खाटू में वर्ष 2026 का मर्यादा महोत्सव घोषित है। खूब आध्यात्मिकता-धार्मिकता बनी रहे। चतुर्मास प्रवास व्यवस्था समिति-अहमदाबाद ने भी गीत को प्रस्तुति दी। अक्षय तृतीया व्यवस्था समिति-डीसा की ओर श्री रतनलाल मेहता ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री के मंगलपाठ के साथ मर्यादा महोत्सव के दूसरे दिन का कार्यक्रम सुसम्पन्न हुआ। 



पूज्य गुरुदेव युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी द्वारा नमस्कार महामंत्र के समुच्चारण के साथ 161 वें मर्यादा महोत्सव के द्वितीय दिवस का हुआ शुभारम्भ

पारमार्थिक शिक्षण संस्था की मुमुक्षु बहनों द्वारा मर्यादा महोत्सव के अवसर पर सामूहिक गीत की हुई श्रद्धासिक्त प्रस्तुति


मर्यादा महोत्सव के अवसर पर मुख्यमुनि श्री महावीरकुमारजी ने अनुशासन विषय पर उपस्थित श्रद्धालु समाज को।किया सम्बोधित


मर्यादा के शिखर पुरुष युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी ने मर्यादा महोत्सव के द्वितीय दिवस "आज्ञा की महत्ता" के संदर्भ में उपस्थित श्रद्धालु समाज को प्रदान किया प्रेरणा पाथेय


आचार्य श्री महाश्रमण मर्यादा महोत्सव प्रवास व्यवस्था समिती : भुज - कच्छ के अध्यक्ष श्री कीर्तिभाई संघवी ने श्रीचरणों में प्रस्तुत की कृतज्ञता पूर्ण भावाभिव्यक्ति


तेरापंथ समाज - भुज कच्छ ने "जय मर्यादा - जय मर्यादा" गीत की समवेत स्वर में दी श्रद्धासिक्त प्रस्तुति


भुज के दीक्षित संत मुनि श्री अनंतकुमारजी द्वारा भावाभिव्यक्ति के पश्चात ज्ञानशाला के बच्चों द्वारा "यह महोत्सव है मर्यादा का" गीत की हुई भावपूर्ण प्रस्तुति


पूज्य गुरुदेव के सानिध्य में आचार्य श्री महाश्रमण मर्यादा महोत्सव प्रवास व्यवस्था समिति - छोटी खाटू द्वारा वर्ष - 2026 के लोगो के अनावरण के पश्चात छोटी खाटू वासियों द्वारा हुई गीत की श्रद्धासिक्त प्रस्तुति


केंद्रीय संस्थाओं द्वारा प्रस्तुति के क्रम में संस्था शिरोमणि तेरापंथी महासभा, अभातेयुप, टीपीएफ, जैन विश्व भारती - लाडनूँ , अणुविभा के अध्यक्षों द्वारा संस्थाओं की गतिविधियों की दी प्रस्तुति के पश्चात विकास परिषद सदस्य श्री पदमचंदजी पटावरी ने प्रस्तुत की अपनी भावाभिव्यक्ति















रविवार, फ़रवरी 02, 2025

161 वां मर्यादा महोत्सव 2025 का प्रथम दिन

भुज की धरा पर प्रारम्भ हुआ मर्यादा का महाकुम्भ ‘161वां मर्यादा महोत्सव’

गुजरात का प्रथम मर्यादा महोत्सव भुज के स्मृतिवन में हुआ समायोजित

सेवाकेन्द्रों पर आचार्यश्री ने की नियुक्तियां, सेवा को समर्पित रहा प्रथम दिवस

चतुर्विध धर्मसंघ में बनी रहे आध्यात्मिक सेवा भावना : तेरापंथाधिशास्ता महाश्रमण

अनेक कृतियां व जयतिथि पत्रक आचार्यश्री के समक्ष हुए लोकार्पित

करीब चार घंटे तक चलता रहा मर्यादा महोत्सव का कार्यक्रम


02.02.2025, रविवार, भुज, कच्छ (गुजरात), इस समय एक ओर जहां सनातन परंपरा में भारत के उत्तरप्रदेश के प्रयागराज में महाकुम्भ में बसंत पंचमी के अवसर पर अमृत स्नान हो रहा है तो दूसरी ओर भारत के पश्चिम भाग में स्थित गुजरात प्रदेश के कच्छ जिले के भुज नगर में जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ के वर्तमान अधिशास्ता, युगप्रधान, शांतिदूत आचार्यश्री महाश्रमणजी की मंगल सन्निधि में भुज में बने स्मृतिवन (जिसे वर्ष 2001 में आए भूकंप में हताहत हुए लोगों की स्मृति में बनाया गया है।) के परिसर में बने जय मर्यादा समवसरण में गुजरात के प्रथम मर्यादा महोत्सव व तेरापंथ धर्मसंघ की परंपरा का 161वां मर्यादा का महाकुम्भ मर्यादा महोत्सव का महामंगल शुभारम्भ हुआ। जय मर्यादा समवसरण के विशाल पण्डाल में श्रद्धा का पारावार उमड़ आया था। उपस्थित था तेरापंथ धर्मसंघ का चतुर्विध धर्मसंघ। मंच के मध्य दोपहर लगभग 12.15 बजे से कुछ समय पूर्व तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी विराजमान हुए तो श्रद्धालुओं के बुलंद जयघोष से पूरा स्मृतिवन गुंजायमान हो उठा। 

महातपस्वी आचार्यश्री महाश्रमणजी ने मंगलमहामंत्रोच्चार करने के उपरान्त तेरापंथ धर्मसंघ के आद्य अनुशास्ता आचार्यश्री भिक्षु व श्रीमज्जयाचार्यजी का सश्रद्धा स्मरण करते हुए 161वें मर्यादा महोत्सव के त्रिदिवसीय कार्यक्रम के शुभारम्भ की घोषणा की। तत्पश्चात आचार्यश्री ने मर्यादा महोत्सव के आधार पत्र ‘मर्यादा पत्र’ को स्थापित किया और इसके साथ ही प्रारम्भ हो गया गुजरात में समायोजित प्रथम मर्यादा महोत्सव का भव्य कार्यक्रम। चतुर्विध धर्मसंघ ने जयघोष करने के उपरान्त मुनि दिनेशकुमारजी के नेतृत्व में मर्यादा गीत का संगान किया गया। 

उपासक श्रेणी ने गीत का संगान किया। मर्यादा महोत्सव व्यवस्था समिति-भुज के स्वागताध्यक्ष श्री नरेन्द्रभाई मेहता ने अपनी अभिव्यक्ति दी। सेवा के लिए समर्पित इस प्रथम दिवस पर साध्वीवृंद की ओर से साध्वी मुदितयशाजी ने आचार्यश्री से सेवा में नियोजित करने की प्रार्थना की तो मुनिवृंद की ओर मुनि कुमारश्रमणजी ने सेवा में नियोजित करने की प्रार्थना की। 

तदुपरान्त साध्वीवर्या साध्वी सम्बुद्धयशाजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को तेरापंथ धर्मसंघ में सेवा के महत्त्व को व्याख्यायित किया। 161वें मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिवस पर तेरापंथाधिशास्ता आचार्यश्री महाश्रमणजी ने उपस्थित चतुर्विध धर्मसंघ को पावन संबोध प्रदान करते हुए कहा कि आज जैन श्वेताम्बर तेरापंथ धर्मसंघ का मर्यादा महोत्सव का त्रिदिवसीय समारोह शुरु हुआ है। बसंतपंचमी के दिन से यह समारोह शुरु होता है। इसके प्रथम दिन सेवा की बात होती है। सेवा एक धर्म है। सेवा से कितना पुण्योपार्जन हो सकता है। सेवा के अनेक प्रकार हो सकते हैं। किसी की शारीरिक सेवा करना, वृद्ध को सहारा देना, भोजन देना, दवाई देना, किसी के शरीर की सार-संभाल करना। आज की बात शारीरिक, मानसिक, आध्यात्मिक सेवा करने की बात है। वैय्यावृत्त के रूप में सेवा के अलावा अन्य प्रकार से भी सेवा की जा सकती है। प्रवचन करना भी एक प्रकार की सेवा है। साधु-साध्वियां न्यारा में रहें तो आठ प्रहर में एक बार व्याख्यान देने का प्रयास करना चाहिए। परम पूज्य आचार्यश्री तुलसी के समय तो माईक आदि की व्यवस्था भी नहीं होती थी, तब भी वे प्रतिदिन प्रवचन किया करते थे। आज कई साधु-साध्वियों का दीक्षा दिवस है तो दीक्षा देना भी एक प्रकार की सेवा है। मुनिकुमारश्रमणजी के निमित्त से दीक्षा की बात याद आ गई। 

गुरुदेव तुलसी प्रवचन करते थे। वे अध्यापन भी कराते थे। ग्रंथ पढ़ाना, वर्तनी शुद्ध कराना, साधु-साध्वी के सेवा की व्यवस्था। धर्मसंघ की सेवा करना। साधु-साध्वियों की पृच्छा करना। समाज की संस्थाओं की भी सेवा करते थे और फिर यात्रा करना। आचार्यश्री तुलसी पहली बार कोलकाता और दक्षिण भारत पधारे थे। उनसे पहले हमारे धर्मसंघ में कोई भी आचार्य न कोलकाता पधारे और न ही दक्षिण भारत पधारे थे। पारमार्थिक शिक्षण संस्था की मुमुक्षु बाइयों को संभालना भी अच्छी सेवा है। साध्वीवर्या और अनेक समणियां भी इस कार्य से जुड़ी हुई हैं। समाज के लोग अपने ढंग से ध्यान दे लेते हैं। इनकी सेवा करना भी अच्छी बात होती है। मुमुक्षु की संख्या वृद्धि का प्रयास जितना संभव हो सके, करने का प्रयास करना चाहिए। 

आचार्यश्री ने सेवाकेन्द्रों पर सेवा की नियुक्ति का क्रम प्रारम्भ करते हुए कहा कि लाडनूं सेवाकेन्द्र (साध्वीवृंद) में साध्वी कार्तिकयशाजी के ग्रुप को सेवा के लिए नियोजित किया। बीदासर समाधिकेन्द्र में साध्वी मंजुयशाजी के ग्रुप को नियुक्त किया। श्रीडूंगरगढ़ सेवाकेन्द्र में साध्वी संगीतश्रीजी व साध्वी परमप्रभाजी के ग्रुप को नियोजित किया। गंगाशहर सेवाकेन्द्र में साध्वी विशदप्रभाजी व साध्वी लब्धियशाजी के ग्रुप को तथा हिसार उपसेवाकेन्द्र में साध्वी शुभप्रभाजी के गुप को सेवा के लिए नियोजित किया। संतों के सेवाकेन्द्र में छापर सेवाकेन्द्र के लिए मुनि देवेन्द्रकुमारजी के ग्रुप को तथा जैन विश्व भारती, लाडनूं में मुनिश्री विजयकुमारजी स्वामी के ग्रुप के साथ मुनि तन्मयकुमार व मुनि कांतिकुमारजी को सेवा के लिए नियुक्त किया। आचार्यश्री ने गंगाशहर में सेवा के लिए मुनिश्री कमलकुमारजी स्वामी के ग्रुप को सेवा के लिए नियुक्ति देने के साथ-साथ गंगाशहर की अच्छी सार-संभाल करने की अभिप्रेरणा भी प्रदान की। 

तदुपरान्त आचार्यश्री ने समस्त साधु-साध्वियों को सेवा की भावना को पुष्ट बनाए रखने की प्रेरणा भी प्रदान की। सेवा का संस्कार सभी में अच्छे रूप में बने रहें। श्रावक समाज भी कितनी सेवा देते हैं। दवा, चिकित्सा आदि के अलावा साधु-साध्वियों की यात्रा व्यवस्था में साथ चलना, डेरों आदि में रहते हैं। सभी में आध्यात्मिक सेवा की भावना बनी रहे। 

जैन विश्व भारती के द्वारा प्रकाशित आचार्यश्री की कृति ‘छह बातें ज्ञान की’, समणी कुसुमप्रज्ञाजी के सहयोग से ‘प्रकिर्णक संचय’ तथा जय तिथि पत्रक आदि आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित की गई। मित्र परिषद, कोलकाता द्वारा तिथि दर्पण को भी आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया गया। इस संदर्भ में आचार्यश्री ने मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। समणी कुसुमप्रज्ञाजी ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। ‘बेटी तेरापंथ की’ की सदस्याओं ने गीत का संगान किया। आचार्यश्री ने बेटियों को मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। 

आज के कार्यक्रम में स्थानकवासी समुदाय की साध्वीजी भी आई थीं। आचार्यश्री ने उन्हें मंगल आशीर्वाद प्रदान किया। ‘जो प्राप्त है, वह पर्याप्त है’ नामक ग्रंथ को छाजेड़ परिवार द्वारा आचार्यश्री के समक्ष लोकार्पित किया गया। श्रीडूंगरगढ़ छाजेड़ परिवार की बहू-बेटियों ने गीत का संगान किया। डॉ. शांताबेन, विकास परिषद के सदस्य श्री पदमचंद पटावरी तथा श्रीमती मनीषा छाजेड़ ने ग्रंथ के संदर्भ में अपनी अभिव्यक्ति दी। 

आचार्यश्री ने इस ग्रंथ के संदर्भ में कहा कि संघसेवी स्व. कन्हैयालाल छाजेड़ के स्मृति ग्रंथ के संदर्भ में आशीर्वाद प्रदान करते हुए कहा कि इससे पाठकों को अच्छी प्रेरणा मिले। इनके परिवार में अच्छे धार्मिक संस्कार पुष्ट होते रहें।
भारतीय जनता पार्टी के कच्छ जिलाध्यक्ष श्री देवजी भाई अहीर ने आचार्यश्री के दर्शन कर अपनी श्रद्धाभिव्यक्ति दी। स्मृतिवन के डायरेक्टर श्री पाण्डेयजी, अमृतवाणी के अध्यक्ष श्री ललित दुगड़, श्री मदनलाल तातेड़, आचार्य भिक्षु समाधि स्थल संस्थान, सिरियारी की ओर से श्री मर्यादा कोठारी, आचार्यश्री तुलसी शांति प्रतिष्ठा, गंगाशहर की ओर से श्री हंसराज डागा, प्रेक्षा विश्व भारती के श्री भेरुभाई चौपड़ा, प्रेक्षा इंटरनेशनल के अध्यक्ष श्री अरविंद संचेती ने अपनी भावाभिव्यक्ति दी। आचार्यश्री के मंगलपाठ से मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिवस का कार्यक्रम सम्पन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन मुनि दिनेशकुमारजी ने किया। लगभग चार घंटे तक चले इस कार्यक्रम को आदिनाथ चैनल व तेरापंथ के यूट्यूब चैनल ‘तेरापंथ’ पर लाइव किया गया। जिससे देश व विदेश में बैठे श्रद्धालु लाभान्वित हुए।  



गुर्जर धरा पर आयोजित हो रहा है प्रथम मर्यादा महोत्सव

श्रद्धा, भक्ति एवं समर्पण के त्रिवेणी संगम स्वरूप तेरापंथ के महाकुंभ का

कच्छ (गुजरात) की धरा पर हुआ भव्य आग़ाज़

मर्यादा के शिखर पुरुष आचार्य श्री महाश्रमणजी के मुखारविंद से नमस्कार महामंत्रोच्चार से त्रिदिवसीय मर्यादा महोत्सव का हुआ प्रारंभ

पूज्य गुरुदेव युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने आचार्य श्री भिक्षु एवं श्रीमद् जयाचार्य का स्मरण करते हुए 161 वें मर्यादा महोत्सव के प्रारम्भ की घोषणा करते हुए ऐतिहासिक मर्यादा पत्र की स्थापना की


बहुश्रुत परिषद् सदस्य मुनिश्री दिनेशकुमारजी द्वारा घोष उच्चारण एवं "भीखणजी स्वामी भारी मर्यादा बांधी" गीत के संगान के पश्चात उपासक श्रेणी ने दी "ओ गुरु दो ऐसा आशीर्वर" गीत की श्रद्धाशिक्त प्रस्तुति


पूज्य प्रवर के समक्ष साधु साध्वी वृंद द्वारा सेवा हेतु नियुक्ति के लिए क्रमशः किया गया निवेदन

साध्वी समाज की ओर से साध्वी श्री मुदितयशाजी ने किया सेवा हेतु नियुक्ति का निवेदन

संत समाज की ओर से मुनिश्री कुमारश्रमण जी ने किया सेवा हेतु नियुक्ति का निवेदन


साध्वीवर्या साध्वी श्री सम्बुद्धयशाजी ने मर्यादा महोत्सव के अवसर पर सेवा के सन्दर्भ में प्रस्तुत की अपनी भावाभिव्यक्ति


पूज्य गुरुदेव युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी ने उपस्थित श्रद्धालु समाज को सेवा के संदर्भ में प्रदान किया प्रेरणा पाथेय

जो दूसरों के लिए कार्य करे वह कार्यकर्ता होता है : युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमणजी


161 वें मर्यादा महोत्सव के प्रथम दिवस पूज्य गुरुदेव द्वारा आगामी वर्ष के लिए विभिन्न सेवा केंद्रों में सेवा हेतु नियुक्तियों की हुई घोषणा



मर्यादा महोत्सव के उपलक्ष में भुज से तेरापंथ की बेटियों ने दी "महाश्रमण इस युग में तेरापंथ के राम" गीत की श्रद्धासिक्त प्रस्तुति


पूज्य गुरुदेव की सन्निद्धि में विकास परिषद् के पूर्व संयोजक स्व. कन्हैयालाल जी छाजेड़ से सम्बद्ध स्मृति ग्रन्थ "जो प्राप्त है वह पर्याप्त है" का हुआ लोकार्पण